ट्रंप के बयान के बाद मुस्लिम समुदाय वैश्विक संदेह के घेरे में
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने यह घोषणा करके पूरी दुनिया में सनसनी फैला दी है कि अब विश्व से मुस्लिम आतंकवाद को समाप्त करना आवश्यक हो गया है। ट्रंप ने अपने बयान में आतंकवाद के विरुद्ध सामान्य रूप से कुछ नहीं कहा, बल्कि उन्होंने सीधे मुस्लिम आतंकवाद शब्द का प्रयोग किया। यही नहीं, उन्होंने नाइजीरिया में मुस्लिम आतंकवादियों के विरुद्ध हवाई आक्रमण भी कराया।
यह स्थिति एक अत्यंत गंभीर सवाल खड़ा करती है कि क्या अब दुनिया में आतंकवाद की पहचान इस्लाम के साथ जोड़ी जा रही है। क्या मुसलमान अब केवल धार्मिक दृष्टि से नहीं, बल्कि सामाजिक दृष्टि से भी खतरनाक सिद्ध किए जा रहे हैं। यह प्रश्न इसलिए और भी महत्वपूर्ण हो जाता है क्योंकि दुनिया में यहूदियों के खिलाफ ऐसी आवाज नहीं उठती, हिंदुओं के खिलाफ ऐसी कोई वैश्विक मुहिम नहीं दिखाई देती और यहां तक कि कम्युनिस्ट विचारधारा के संदर्भ में भी इस तरह की सामूहिक पहचान बनाकर बात नहीं की जाती।
तो फिर यह क्या कारण है कि पूरी दुनिया में मुसलमानों के खिलाफ इस प्रकार की भाषा और विचार सामने आ रहे हैं। सारी दुनिया ने देखा कि ग़ज़ा में इसराइल द्वारा लगभग 70,000 लोगों को मार दिया गया, लेकिन इसके बावजूद कहीं से वैसी तीखी वैश्विक प्रतिक्रिया देखने को नहीं मिली। न किसी मुस्लिम देश ने ठोस हस्तक्षेप किया और न ही विश्व के अन्य देशों ने इस पर कोई निर्णायक कदम उठाया।
इन घटनाओं के बीच अब दुनिया के मुसलमानों को गंभीरता से यह विचार करना चाहिए कि आखिर पूरी दुनिया उन्हें संदेह की दृष्टि से क्यों देखने लगी है। ये आवाज आतंकवाद के खिलाफ उठनी चाहिए थी, लेकिन आज यह आवाज मुस्लिम आतंकवाद के खिलाफ उठ रही है। पूरे विश्व के मुस्लिम समुदाय को इस विषय पर गंभीरता से विचार करनी चाहिए। धर्म के नाम पर कट्टरपंथियों का संरक्षण उन्हें वैश्विक स्तर पर हाशिये पर ले जा रहा है।

