छत्तीसगढ़: पढ़े-लिखे किसान ने पकड़ी दोहरी वसूली, कम पढ़े किसानों के साथ क्या हो रहा है?
रामानुजगंज, 9 फरवरी 2026।
बलरामपुर-रामानुजगंज जिले में सहकारी बैंकिंग व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में है। भंवरमाल निवासी किसान राम जन्म कुशवाहा ने जिला सहकारी केंद्रीय बैंक मर्यादित की रामानुजगंज शाखा पर दोहरी वसूली का गंभीर आरोप लगाया है।
कुशवाहा के अनुसार, उन्होंने 28 नवंबर 2025 को अपने ऋण खाते में ₹20,922 नकद जमा किए। लेनदेन संख्या TXN 733330032622 दर्ज है। इसके बावजूद 8 जनवरी 2026 को धान खरीदी भुगतान से वही राशि पुनः काट ली गई, जिसकी पावती 13 जनवरी 2026 को जारी हुई।
किसान का कहना है कि यदि वे स्वयं रसीद और खाता विवरण मिलान न करते, तो यह राशि हमेशा के लिए कट जाती।
पुराने घोटालों की पृष्ठभूमि
रामानुजगंज की इस शाखा का नाम पहले भी वित्तीय अनियमितताओं में सामने आ चुका है। वर्ष 2023 में KCC से जुड़े लगभग ₹1.33 करोड़ के गबन का मामला उजागर हुआ था। इससे पहले 2012 से 2022 के बीच फर्जी खातों के माध्यम से करीब ₹26 करोड़ के घोटाले की जांच में 11 से अधिक बैंक कर्मियों की गिरफ्तारी हुई थी।
इन घटनाओं ने ग्रामीणों के बीच बैंक की कार्यप्रणाली पर भरोसे को पहले ही कमजोर किया था। अब दोहरी वसूली का आरोप सामने आने से संदेह और गहरा गया है।
बड़ा सवाल: कम पढ़े-लिखे किसानों का क्या?
राम जन्म कुशवाहा स्वयं खातों का हिसाब रखने में सक्षम हैं। उन्होंने रसीद सुरक्षित रखी, भुगतान का मिलान किया और आपत्ति दर्ज कराई। लेकिन क्षेत्र के अनेक किसान ऐसे हैं जो बैंकिंग प्रक्रिया, डिजिटल एंट्री या खाता विवरण की बारीकियों से परिचित नहीं।
ग्रामीणों का कहना है कि कई बार किसान बिना पढ़े दस्तावेजों पर हस्ताक्षर कर देते हैं। बैंक स्टेटमेंट की जांच नहीं हो पाती। धान खरीदी या सब्सिडी राशि में कटौती का कारण भी स्पष्ट नहीं बताया जाता। ऐसे में त्रुटि हो या गड़बड़ी, नुकसान किसान का ही होता है।
यदि एक पढ़ा-लिखा किसान महीनों बाद दोहरी वसूली पकड़ पाया, तो शेष किसानों के खातों में क्या स्थिति है, यह जांच का विषय है।
जांच और कार्रवाई की मांग
स्थानीय किसान संगठनों ने मामले की स्वतंत्र जांच की मांग की है। सहकारिता विभाग से अनुरोध किया गया है कि:
संबंधित खाते का ऑडिट कराया जाए
दोहरी वसूली की राशि तत्काल लौटाई जाए
शाखा के पिछले लेनदेन की व्यापक जांच हो
किसानों के लिए विशेष जागरूकता शिविर लगाए जाएं
ग्रामीणों का कहना है कि बैंकिंग व्यवस्था विश्वास पर चलती है। यदि वही भरोसा डगमगाए, तो सबसे बड़ा आघात उस किसान को होता है जो पहले ही मौसम, बाजार और लागत की मार झेल रहा है।
राम जन्म कुशवाहा का मामला केवल एक व्यक्ति की शिकायत नहीं माना जा रहा, बल्कि यह उन अनगिनत किसानों की चिंता बनता जा रहा है जो बैंक के काउंटर पर भरोसा करके अपनी मेहनत की कमाई जमा करते हैं।
अब नजर प्रशासनिक जांच पर है। सवाल साफ है: क्या यह केवल तकनीकी त्रुटि है, या फिर व्यवस्था में कोई गहरी खामी छिपी है?



