प्रशासन के खिलाफ आदिवासी समाज का फूटा गुस्सा: चक्काजाम और धरना प्रदर्शन, लिखित आश्वासन के बाद शांत हुआ आंदोलन
जामवंतपुर (संवाददाता) | जामवंतपुर क्षेत्र में आदिवासी समाज का आक्रोश सड़कों पर देखने को मिला। जमीन विवाद, सीमांकन और भू-माफियाओं के बढ़ते आतंक से परेशान आदिवासी समाज ने अध्यक्ष बसंत कुजूर के नेतृत्व में विशाल धरना प्रदर्शन और चक्काजाम किया। समाज का आरोप है कि प्रशासन को बार-बार ज्ञापन सौंपने के बावजूद अब तक कोई संतोषजनक कार्यवाही नहीं हुई है।
प्रमुख बिंदु:
भू-माफियाओं का आतंक: समाज के लोगों का कहना है कि भू-माफिया तरह-तरह के हथकंडे अपनाकर सीधे-साधे आदिवासियों की जमीनें हड़प रहे हैं और उन्हें प्रताड़ित कर रहे हैं।
प्रशासनिक उदासीनता: पूर्व में कलेक्टर को ज्ञापन देने के बाद भी कार्यवाही न होने से समाज में ‘ठगा हुआ’ महसूस करने की भावना बढ़ी है।
मातृशक्ति और युवाओं की हुंकार: आंदोलन में महिलाओं (मातृशक्ति) की भारी भीड़ और युवाओं की बढ़ती सक्रियता ने यह स्पष्ट कर दिया कि समाज अब अपने अधिकारों के प्रति जागरूक हो चुका है और भेदभावपूर्ण व्यवहार बर्दाश्त नहीं करेगा।
प्रशासनिक पहल और भारी सुरक्षा बल
तनावपूर्ण स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए थे। मौके पर तहसीलदार मनोज पैकरा और आरआई राम लखन सिंह अपनी टीम के साथ पहुंचे। अधिकारियों द्वारा पहले मौखिक आश्वासन दिया गया, जिसे समाज ने सिरे से खारिज कर दिया।
एक सप्ताह का अल्टीमेटम
आदिवासी समाज के अध्यक्ष बसंत कुजूर ने दो-टूक शब्दों में कहा कि उन्हें खोखले आश्वासन नहीं बल्कि समाधान चाहिए। समाज की जिद पर तहसीलदार ने उच्चाधिकारियों से चर्चा के बाद लिखित में आश्वासन दिया कि शिकायतों का निराकरण जल्द किया जाएगा। समाज ने चेतावनी दी है कि यदि एक सप्ताह के भीतर संपूर्ण समाधान नहीं हुआ, तो वे पुनः उग्र आंदोलन के लिए मजबूर होंगे।
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📢 बड़ी खबर: जामवंतपुर में आदिवासियों का महासंग्राम!
📍 भू-माफियाओं और जमीनी विवादों से तंग आकर आदिवासी समाज ने किया चक्काजाम। 📍 अध्यक्ष बसंत कुजूर के नेतृत्व में गूंजा ‘हक और न्याय’ का नारा। 📍 महिलाओं और युवाओं की भारी उपस्थिति ने प्रशासन को झुकाया। 📍 तहसीलदार मनोज पैकरा ने दिया लिखित आश्वासन, एक सप्ताह में समाधान का वादा।

