छत्तीसगढ़ DMF घोटाला: करोड़ों के सिंडिकेट का पर्दाफाश, कारोबारी सतपाल छाबड़ा गिरफ्तार; 25 फरवरी तक रिमांड पर
रायपुर | छत्तीसगढ़ में जिला खनिज न्यास (DMF) फंड में हुए करोड़ों रुपये के कथित घोटाले में एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) और राज्य आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW) ने एक बड़ी कार्रवाई की है। इस मामले में संलिप्तता के ठोस सबूत मिलने के बाद गुरुवार, 19 फरवरी को व्यवसायी सतपाल छाबड़ा को गिरफ्तार कर लिया गया।

कृषि योजनाओं में बड़ी सेंधमारी
ACB की जांच में खुलासा हुआ है कि सतपाल छाबड़ा उस ‘भ्रष्ट सिंडिकेट’ का प्रमुख हिस्सा था, जिसमें रसूखदार अधिकारी, कर्मचारी और बिचौलिए शामिल थे। इस समूह ने नियमों और पारदर्शी निविदा प्रक्रियाओं को दरकिनार कर विशेष रूप से कृषि अनुदान योजनाओं में भारी अनियमितताएं कीं। जांच के अनुसार, कृषि उपकरणों और अन्य सामग्रियों की आपूर्ति के नाम पर सरकारी खजाने को करोड़ों रुपये का आर्थिक चूना लगाया गया है।
कमीशन का ‘डिजिटल ट्रेल’ और रिश्तेदारों के खाते
जांच एजेंसी ने कोर्ट को बताया कि छाबड़ा ने इस घोटाले के जरिए करोड़ों रुपये की अवैध कमीशन राशि प्राप्त की थी।
नेटवर्क: यह राशि नकद और आरोपी के रिश्तेदारों के बैंक खातों के माध्यम से घुमाई गई।
सबूत: ब्यूरो ने विस्तृत वित्तीय जांच और डिजिटल साक्ष्यों (ईमेल ट्रेल और व्हाट्सएप चैट) के आधार पर छाबड़ा की आपराधिक साजिश में संलिप्तता की पुष्टि की है।
25 फरवरी तक पुलिस रिमांड
आरोपी सतपाल छाबड़ा को शुक्रवार को स्थानीय न्यायालय में पेश किया गया। ACB ने मामले की गहराई तक जाने और सिंडिकेट के अन्य चेहरों को बेनकाब करने के लिए पूछताछ हेतु रिमांड की मांग की थी। अदालत ने दलीलों को सुनने के बाद आरोपी को 25 फरवरी 2026 तक पुलिस रिमांड पर भेज दिया है।
इन धाराओं के तहत दर्ज है मामला
ब्यूरो ने इस पूरे घोटाले में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (संशोधित 2018) के साथ-साथ भारतीय दंड संहिता (IPC) की गंभीर धाराओं में प्रकरण दर्ज किया है:
धारा 420: धोखाधड़ी
धारा 120B: आपराधिक साजिश
धारा 467, 468 और 471: दस्तावेजों की जालसाजी और कूटरचना
अधिकारियों का कहना है: “यह गिरफ्तारी केवल एक कड़ी है। जांच में कई अन्य ठेकेदारों और अधिकारियों के नाम सामने आ रहे हैं, जिन पर जल्द ही शिकंजा कसा जा सकता है।
