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पर्यावरणवादी उत्पादकता बढ़ाने में बाधक

पर्यावरणवादी उत्पादकता बढ़ाने में बाधक:

वर्तमान में मैं छत्तीसगढ़ के सरगुजा क्षेत्र में हूँ। पिछले 5 वर्षों में इस क्षेत्र की कोयला खदानों को लगातार रोका जा रहा था। कांग्रेस के कार्यकर्ता पर्यावरणवादी के वेश में कोयला खदानों का काम बंद कर दे रहे थे और सरकार भी राहुल गांधी को प्रसन्न करने के लिए इन कोयला खदानों को डिस्टर्ब करती रहती थी। विदित हो कि यहां की कोयला खदान राजस्थान सरकार के माध्यम से अडानी संचालित करते हैं। अडानी विरोध के नाम पर इन खदानों को रोका जा रहा था। नई सरकार ने शपथ ग्रहण की और उसके एक दिन बाद से ही इन कोयला खदानों को चालू कर दिया गया। जो 15-20 लोग कई वर्षों से इन कोयला खदानों को रोक रहे थे इन सबको पुलिस वालों ने पकड़ लिया और फिर अडानी की वह खदान का काम शुरू कर दिया गया। पर्यावरणवादी के नाम पर यह लोग कोयला खदान का काम रोक रहे थे। दुनिया जानती है कि भारत में कोयले का अभाव है और कोयला विदेश से मंगाना पड़ रहा है। ऐसी स्थिति में भी यह लोग पर्यावरण के नाम पर नाटक कर रहे थे। लेकिन एक दिन में ही सारा पर्दाफाश हो गया और यह खदानों का काम फिर से चालू हो गया हैं। मेरा फिर से सुझाव है कि भारत विदेशों से आयात करें और अपना उत्पादन इस प्रकार के देशद्रोही लोगों के दबाव में बंद न होने दे। यह तो सरासर सरकार की नाकामी है। अडानी, अंबानी सहित देश के अनेक उद्योगपति भारत की आर्थिक प्रगति में जो सहयोग कर रहे हैं उसके लिए वह बधाई के पात्र हैं।

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