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सोशल मीडिया इनफ्लुएंसर/पत्रकार आकांक्षा टोप्पो की गिरफ्तारी फिर रिहाई पर गर्माई छत्तीसगढ़ की सियासत:

  • सीतापुर (सरगुजा)। छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले के सीतापुर क्षेत्र में एक दिव्यांग परिवार के विस्थापन और उसके समर्थन में आवाज उठाने वाली सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर आकांक्षा टोप्पो की गिरफ्तारी ने राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज कर दी है। मामला बटईकेला गांव का है, जहां खसरा नंबर 1784 पर वर्षों से काबिज एक चार दिव्यांग सदस्यों वाले परिवार के घर को प्रशासन ने “अवैध निर्माण” बताकर ढहा दिया है।
    क्या है पूरा मामला?
    बताया जा रहा है कि बटईकेला गांव में एक ही परिवार के चार दिव्यांग सदस्य शासकीय भूमि पर निवास कर रहे थे। प्रशासन द्वारा उक्त भूमि पर आंगनबाड़ी केंद्र का निर्माण प्रस्तावित होने के कारण परिवार को वहां से बेदखल कर दिया गया। बेघर होने की कगार पर खड़े इस परिवार ने हताशा में सरगुजा कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर इच्छा मृत्यु की मांग तक कर दी थी।
    पूर्व मंत्री अमरजीत भगत ने साधा सरकार पर निशाना
    इस मामले में राजनीति तब गरमा गई जब पूर्व कैबिनेट मंत्री अमरजीत भगत ने सरकार की कार्यवाही को “अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को कुचलने वाला” बताया। उन्होंने कहा:
    “सरकार सवालों का जवाब देने के बजाय पुलिस भेजकर एक बहादुर आदिवासी बेटी को अपराधी बना रही है। संवैधानिक स्वतंत्रता की आवाज को दबाया जा रहा है।”
    आकांक्षा टोप्पो पर कानूनी कार्यवाही (Crime No. 471/25)
    पुलिस ने आकांक्षा टोप्पो के खिलाफ अपराध क्रमांक 471/25 के तहत BNS की धारा 353(2) के अंतर्गत मामला दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार कर लिया है। उन पर निम्नलिखित आरोप लगाए गए हैं:
    • मर्यादाहीन भाषा: विधायक राजकुमार टोप्पो और महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े की शिकायत है कि आकांक्षा ने उनके खिलाफ आपत्तिजनक और अशोभनीय शब्दावली का प्रयोग किया।
    • धारा 353(2): पुलिस के अनुसार, आकांक्षा ने सार्वजनिक सेवक/जनप्रतिनिधियों के कर्तव्य निर्वहन में बाधा डाली और ऐसी भाषा का प्रयोग किया जिससे सामाजिक सौहार्द और सार्वजनिक शांति भंग हो सकती थी।
    जनता और जनप्रतिनिधियों के बीच द्वंद्व:
    जहाँ एक ओर सत्ता पक्ष का तर्क है कि आलोचना और विरोध की भाषा मर्यादित होनी चाहिए, वहीं विपक्ष और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि अभिव्यक्ति की आजादी का गला घोंटा जा रहा है।
    जनप्रतिनिधियों और सक्षम अधिकारियों को कम से कम उन चार दिव्यांग सदस्यों वाले परिवार के पुनर्वास की भी चिंता करनी चाहिए थी।
    सवाल तो यह भी है कि प्रशासनिक भूमि पर अवैध कब्जे से मुक्ति पर कार्यवाही तो होनी ही चाहिए, मगर कैसे?
    वर्तमान में, आकांक्षा टोप्पो की गिरफ्तारी और मुचलके पर रिहा होने के बाद सीतापुर क्षेत्र और पूरे छत्तीसगढ़ में बहस का मुद्दा बना हुआ है। जनता की नाराजगी का व्यापक असर आगामी चुनावों पर पड़ सकता है।”

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