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खालिदा जिया का निधन: भारत कनेक्शन और भारत-बांग्लादेश संबंधों की विरासत

ढाका, 30 दिसंबर 2025

बांग्लादेश की पहली महिला प्रधानमंत्री बेगम खालिदा जिया का 30 दिसंबर 2025 को ढाका के एवरकेयर अस्पताल में निधन हो गया। वे 80 वर्ष की थीं और पिछले कई महीनों से गंभीर बीमारियों से जूझ रही थीं। उनकी मौत को बांग्लादेश की राजनीति में एक युग के अंत के रूप में देखा जा रहा है।

भारत से व्यक्तिगत संबंध

खालिदा जिया का जन्म भारत के जलपाईगुड़ी (पश्चिम बंगाल) में हुआ था, जो उनके जीवन की शुरुआती पृष्ठभूमि को भारत से जोड़ता है।

2012 में उन्होंने भारत की एक महत्वपूर्ण यात्रा की, जिसमें उन्होंने राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री जैसे शीर्ष नेताओं से मुलाकात की और आतंकवाद के खिलाफ सहयोग का आश्वासन दिया था।

2015 में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से ढाका में हुई मुलाकात को उन्होंने बाद में दोनों देशों के बीच सकारात्मक वार्ता का अवसर बताया।

राजनीतिक संबंध और तनाव

राजनीतिक तौर पर खालिदा जिया की सरकारों के दौरान भारत-बांग्लादेश के रिश्ते जटिल और कभी-कभी तनावपूर्ण रहे।

उनके कार्यकाल में हाल के दशकों में सीमा सुरक्षा, नदी जल विवाद और आतंकवाद के मामलों पर मतभेद उभरे, जिससे दोनों देशों के बीच अविश्वास की स्थितियां भी सामने आईं।

बीएनपी की “भारत विरोधी” रुख की आलोचना भी होती रही, खासकर जब सरकार में रहते हुए उन्होंने भारत के साथ कुछ नीतिगत समझौतों और ट्रांजिट अधिकार जैसे मुद्दों पर विरोध किया।

समकालीन प्रतिक्रियाएं

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खालिदा जिया के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया और उनके योगदान को याद किया। उन्होंने 2015 की मुलाकात और दोनों देशों के रिश्तों में उनके सकारात्मक योगदान की बात की।

भारत और बांग्लादेश दोनों ही जगह से नेताओं ने उनकी भूमिका की सराहना की है, वहीं कुछ विश्लेषक उनकी विरासत को विवादास्पद और जटिल भी मानते हैं।

 

खालिदा जिया की मौत न केवल बांग्लादेश की राजनीति में एक प्रमुख अध्याय का अंत है, बल्कि भारत-नेपाल-बांग्लादेश जैसे दक्षिण एशियाई देशों के बीच चल रहे कूटनीतिक और सुरक्षा संवाद पर भी उसकी छाप रहेगी।

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