BalrampurChhattisgarhLocal NewsUncategorized

धान खरीदी की हकीकत: कागज़ों में रिकॉर्ड, ज़मीन पर संकट FRK, उठाव और भुगतान की तिहरी मार में बलरामपुर के किसान

छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा 3100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से धान खरीदी के दावे इस समय बलरामपुर जिला में ज़मीनी सच्चाई से टकराते दिख रहे हैं। खरीदी केंद्र खुले हैं, टोकन जारी हो रहे हैं, लेकिन धान का उठाव, फोर्टिफाइड राइस कर्नेल (FRK) की आपूर्ति और किसानों को भुगतान—तीनों मोर्चों पर सिस्टम लड़खड़ाता नज़र आ रहा है।

स्थिति यह है कि जिले के 39 उपार्जन केंद्रों पर खरीदी जारी रहने के बावजूद सैकड़ों किसानों के करीब 9.71 करोड़ रुपये का भुगतान अटका हुआ है। किसान धान बेच चुका है, लेकिन पैसे के इंतज़ार में है।


FRK संकट: जहां नीति अटक गई

धान खरीदी में देरी का सबसे बड़ा कारण FRK की कमी बताई जा रही है। केंद्र सरकार की पोषण नीति के तहत चावल का फोर्टिफिकेशन अनिवार्य है, लेकिन जिले में FRK की आपूर्ति समय पर नहीं पहुंच पा रही।
परिणामस्वरूप धान खरीदा तो जा रहा है, लेकिन उसे मिलों तक भेजने और प्रोसेस करने की प्रक्रिया अधूरी पड़ी है। भुगतान इसी चेन से जुड़ा है, इसलिए किसान की रकम बीच रास्ते में फंसी है।

यह सिर्फ तकनीकी बाधा नहीं, बल्कि नीति और क्षमता के बीच तालमेल की कमी को उजागर करता है।


खरीदी ज्यादा, उठाव बेहद कम

सूत्रों के मुताबिक जिले में अब तक लगभग 40 प्रतिशत के आसपास धान खरीदा गया है, लेकिन उठाव कई केंद्रों पर 10 प्रतिशत से भी कम है।
कई जगह एक सप्ताह से ट्रक नहीं पहुंचे। गोदाम भर चुके हैं, खुले में बोरी रखनी पड़ रही है और नमी के कारण धान खराब होने का खतरा बढ़ गया है।

केंद्र प्रभारियों का कहना है कि जगह नहीं होने के कारण अगला टोकन रोकना मजबूरी बन गया है, जिसका सीधा असर किसानों पर पड़ रहा है।


टोकन सिस्टम: राहत के साथ नया तनाव

डिजिटल टोकन व्यवस्था से बिचौलियों की भूमिका कम हुई, लेकिन जब उठाव नहीं हुआ तो यही सिस्टम किसानों के लिए तनाव का कारण बन गया।
कई किसानों को टोकन तो मिला, लेकिन तारीख पर धान नहीं लिया गया। कहीं-कहीं ज्यादा धान लेने और मनमानी कटौती के आरोप भी सामने आए, जिससे नाराज़गी बढ़ी और विरोध की स्थिति बनी।


निलंबन की कार्रवाई, लेकिन सवाल बरकरार

लापरवाही के आरोप में दो पटवारियों को निलंबित किया गया। प्रशासन इसे सख्त कदम बता रहा है, लेकिन किसान संगठनों का कहना है कि इससे मूल समस्या हल नहीं होगी।
क्योंकि FRK सप्लाई, परिवहन और उठाव की जिम्मेदारी नीति और व्यवस्था से जुड़ी है, किसी एक कर्मचारी से नहीं।


बलरामपुर में संकट गहरा क्यों

विशेषज्ञों के अनुसार बलरामपुर जैसे सीमावर्ती और आदिवासी बहुल जिलों में संकट इसलिए ज्यादा गहरा है क्योंकि यहां प्रोसेसिंग और भंडारण की क्षमता सीमित है।
निर्णय जिला स्तर पर नहीं, बल्कि संभाग और राज्य स्तर पर होते हैं, जिससे स्थानीय हालात के अनुसार त्वरित समाधान नहीं निकल पाता।


आगे की चिंता

यदि जल्द ही FRK आपूर्ति और धान उठाव की व्यवस्था नहीं सुधरी तो:

धान खराब होने की घटनाएं बढ़ सकती हैं

किसानों पर कर्ज़ का दबाव बढ़ेगा

रबी फसल की तैयारी प्रभावित होगी

सरकार की MSP नीति पर भरोसा कमजोर पड़ेगा

यह संकट आर्थिक से ज्यादा विश्वास का बनता जा रहा है।


निष्कर्ष

बलरामपुर में धान खरीदी का मौजूदा हाल बताता है कि सिर्फ ऊंची MSP घोषित करना काफी नहीं है।
जब तक खरीदी, उठाव, प्रोसेसिंग और भुगतान की पूरी श्रृंखला ज़मीनी हकीकत के अनुसार नहीं चलेगी, तब तक किसान कागज़ी दावों और वास्तविकता के बीच फंसा रहेगा।

यह रिपोर्ट सिर्फ एक जिले की कहानी नहीं, बल्कि पूरी व्यवस्था के सामने खड़ा सवाल है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *