रायगढ़ तमनार मामला: महिला आरक्षक से बदसुलूकी, विरोध प्रदर्शन से हिंसा तक की पूरी कहानी
रायगढ़ (छत्तीसगढ़)। रायगढ़ जिले के तमनार ब्लॉक में 27 दिसंबर 2025 को कोयला खनन परियोजना के विरोध में हुए प्रदर्शन के दौरान कानून-व्यवस्था उस समय बिगड़ गई, जब उग्र भीड़ ने ड्यूटी पर तैनात एक महिला आरक्षक के साथ बदसुलूकी और मारपीट की। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद प्रशासन और पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठे, वहीं पुलिस ने मामले को गंभीर मानते हुए त्वरित कार्रवाई शुरू की।
क्या थी पूरी घटना
पुलिस और प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार तमनार क्षेत्र के लिबरा इलाके में स्थानीय ग्रामीणों द्वारा खनन परियोजना के खिलाफ प्रदर्शन किया जा रहा था। शुरुआती दौर में प्रदर्शन शांतिपूर्ण बताया गया, लेकिन बाद में भीड़ उग्र हो गई। इसी दौरान सुरक्षा व्यवस्था में तैनात महिला आरक्षक को भीड़ ने घेर लिया।
आरोप है कि महिला आरक्षक को धक्का देकर जमीन पर गिराया गया, उनके साथ हाथापाई की गई और वर्दी से खींचतान की गई। इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो किसी व्यक्ति द्वारा रिकॉर्ड कर लिया गया, जो बाद में सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।
वीडियो वायरल होते ही बढ़ा दबाव
वीडियो सामने आने के बाद राज्य भर में प्रतिक्रिया हुई। महिला पुलिसकर्मी के साथ हुई बदसुलूकी को लेकर राजनीतिक, सामाजिक और प्रशासनिक स्तर पर नाराज़गी जताई गई। इसके बाद Chhattisgarh Police ने वीडियो के आधार पर आरोपियों की पहचान शुरू की और विशेष टीम गठित कर जांच आगे बढ़ाई।
कब और कैसे हुई गिरफ्तारियां
2 जनवरी 2026: पुलिस ने पहले चरण में दो आरोपियों को गिरफ्तार किया।
3–4 जनवरी 2026: जांच आगे बढ़ने पर तीन और आरोपियों को हिरासत में लिया गया।
इस तरह अब तक कुल 5 आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेजा जा चुका है।
गिरफ्तार आरोपियों के नाम
पुलिस द्वारा जारी जानकारी के अनुसार गिरफ्तार किए गए आरोपियों के नाम हैं:
1. मंगल राठिया – ग्राम आमगांव
2. चिनेश खमारी – ग्राम आमगांव
3. प्रेमसिंह राठिया – ग्राम आमगांव
4. कीर्ति श्रीवास – ग्राम आमगांव
5. वनमाली राठिया – ग्राम झरना
पुलिस का कहना है कि सभी आरोपी घटना के समय भीड़ का हिस्सा थे और महिला आरक्षक के साथ हुई बदसुलूकी में उनकी सक्रिय भूमिका रही।
कितने आरोपी अब भी फरार
पुलिस के अनुसार इस मामले में दो आरोपी अभी फरार हैं। वीडियो फुटेज और अन्य साक्ष्यों के आधार पर उनकी पहचान कर ली गई है और संभावित ठिकानों पर लगातार दबिश दी जा रही है।
आरोपियों का पक्ष और पुलिस का जवाब
पूछताछ के दौरान कुछ आरोपियों ने दावा किया कि भीड़ अधिक होने के कारण धक्का-मुक्की हुई और घटना अनजाने में हुई। हालांकि पुलिस इस दलील से सहमत नहीं है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि वीडियो फुटेज में महिला आरक्षक को स्पष्ट रूप से निशाना बनाते हुए देखा जा सकता है, जिससे यह केवल भगदड़ नहीं बल्कि जानबूझकर की गई बदसुलूकी प्रतीत होती है।
किन धाराओं में मामला दर्ज
आरोपियों पर शासकीय कार्य में बाधा, पुलिस पर हमला, महिला की गरिमा को ठेस पहुंचाने और अन्य गंभीर धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। वीडियो रिकॉर्डिंग और उसके प्रसार को लेकर आईटी एक्ट से जुड़ी धाराएं भी जोड़ी गई हैं। जांच पूरी होने के बाद धाराओं में और वृद्धि की संभावना से भी इनकार नहीं किया गया है।
प्रशासन का स्पष्ट संदेश
जिला प्रशासन और पुलिस अधिकारियों ने संयुक्त रूप से कहा है कि विरोध-प्रदर्शन करना नागरिकों का अधिकार है, लेकिन कानून हाथ में लेना और ड्यूटी पर तैनात महिला पुलिसकर्मी के साथ बदसुलूकी किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी। दोषियों के खिलाफ सख्त और उदाहरणात्मक कार्रवाई की जाएगी।
रायगढ़ का यह मामला केवल एक प्रदर्शन के हिंसक हो जाने का नहीं, बल्कि कानून-व्यवस्था और महिला पुलिसकर्मियों की सुरक्षा से जुड़ा गंभीर सवाल है। पुलिस की अब तक की कार्रवाई से साफ है कि प्रशासन इस घटना को हल्के में लेने के मूड में नहीं है। आने वाले दिनों में फरार आरोपियों की गिरफ्तारी और चार्जशीट के बाद यह मामला और स्पष्ट रूप से सामने आएगा।
