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साबरमती से साबरमती रिवरफ्रंट तक: कूटनीति के साथ संस्कृति द्विपक्षीय वार्ता से पहले दोनों नेताओं ने दिन की शुरुआत सांस्कृतिक और ऐतिहासिक प्रतीकों के साथ की:

साबरमती आश्रम: पीएम मोदी और चांसलर मर्ज ने साबरमती आश्रम का दौरा किया और महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि अर्पित की। चांसलर ने विजिटर बुक में गांधीवादी विचारों की प्रासंगिकता पर संदेश भी लिखा।

अंतरराष्ट्रीय पतंग महोत्सव: दोनों नेताओं ने साबरमती रिवरफ्रंट पर आयोजित ‘इंटरराष्ट्रीय पतंग महोत्सव’ में हिस्सा लिया। यहाँ उन्हें एक साथ पतंग उड़ाते हुए भी देखा गया, जो दोनों देशों के बीच बढ़ती नजदीकी का प्रतीक बना।

द्विपक्षीय वार्ता के मुख्य एजेंडे
गांधीनगर के महात्मा मंदिर में आयोजित प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता में निम्नलिखित प्रमुख विषयों पर चर्चा हुई:

रणनीतिक साझेदारी के 25 वर्ष: दोनों नेताओं ने भारत-जर्मनी रणनीतिक साझेदारी की समीक्षा की और इसे अगले चरण पर ले जाने का संकल्प लिया।

रक्षा और सुरक्षा: जर्मनी के साथ रक्षा सौदों, सैन्य तकनीक के हस्तांतरण और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सुरक्षा सहयोग को मजबूत करने पर जोर दिया गया।

हरित और सतत विकास: ग्रीन हाइड्रोजन और अक्षय ऊर्जा के क्षेत्र में निवेश को लेकर महत्वपूर्ण समझौते हुए। विशेष रूप से जर्मन कंपनी ‘यूनिपर’ और भारत की ‘एएम ग्रीन’ के बीच ग्रीन अमोनिया की खरीद को लेकर एक बड़ा समझौता हुआ है।

कौशल विकास और मोबिलिटी: भारतीय पेशेवरों और छात्रों के लिए जर्मनी में अवसरों को बढ़ाने और तकनीकी शिक्षा में सहयोग पर बात हुई।

महत्वपूर्ण क्यों है यह यात्रा?
यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब वैश्विक भू-राजनीतिक समीकरण बदल रहे हैं। चांसलर मर्ज की यह पहली भारत यात्रा जर्मनी की ‘फोकस ऑन इंडिया’ नीति को दर्शाती है। कल, 13 जनवरी को चांसलर मर्ज बेंगलुरु का दौरा करेंगे, जहाँ वे तकनीकी नवाचार और विनिर्माण क्षेत्र (जैसे बॉश का परिसर) में भारत-जर्मन सहयोग का जायजा लेंगे।

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