हिंदू एकजुट होंगे, तो शत्रु होंगे टुकड़े-टुकड़े’: मथुरा में बोले संघ प्रमुख मोहन भागवत
मथुरा: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने हिंदू समाज की एकजुटता को राष्ट्र की सुरक्षा के लिए अनिवार्य बताया है। उत्तर प्रदेश के मथुरा में एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने स्पष्ट किया कि हिंदुओं के बीच आपसी फूट ही ऐतिहासिक रूप से उनकी पराजय का मुख्य कारण रही है।शक्ति का सिद्धांत और भारत का दृष्टिकोण भागवत ने शक्ति के वैश्विक सिद्धांत पर बात करते हुए कहा कि शक्ति का स्वभाव अक्सर कमजोरों को प्रताड़ित करना होता है। उन्होंने दो पहलुओं पर जोर दिया: दुर्बलता का अभिशाप: जो समाज कमजोर होता है, दुनिया की शक्तियां उसे और अधिक सताती हैं। भारत की ‘अमृत शक्ति’: भागवत ने कहा कि दुनिया में शक्ति अक्सर दूसरों को सताने का साधन बनती है, लेकिन भारत के पास ‘अमृत की शक्ति’ है। यह शक्ति विनाश के लिए नहीं, बल्कि संरक्षण और कल्याण के लिए है।फूट ही पराजय की जड़ संघ प्रमुख ने इतिहास का हवाला देते हुए कहा कि हिंदू समाज को अपनी सुरक्षा के लिए अपनी आंतरिक खामियों को दूर करना होगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि:हिंदुओं की आपसी फूट और बिखराव ने ही बाहरी शक्तियों को हावी होने का मौका दिया।जब हिंदू समाज जाति, पंथ और विचारधारा के आधार पर बंटता है, तो वह कमजोर हो जाता है।एकजुटता का कड़ा संदेश दुश्मन शक्तियों को चेतावनी देते हुए मोहन भागवत ने कहा, “ये बाहरी शक्तियां हमारा कुछ नहीं बिगाड़ सकतीं। यदि हिंदू एकजुट होंगे, तो उनके (शत्रु शक्तियों के) टुकड़े-टुकड़े हो जाएंगे।” उन्होंने समाज से आह्वान किया कि वे अपनी सुरक्षा के लिए संगठित हों और शक्ति का संचय करें। भाषण के मुख्य बिंदु: विषय विचार फूट का परिणाम ऐतिहासिक पराजय और कमजोरी।शक्ति का स्वभाव कमजोरों को दबाना, लेकिन भारत की शक्ति कल्याणकारी है। भविष्य का मार्गपूर्ण एकजुटता और आंतरिक मतभेदों का अंत।

