पंजाब में ‘रक्षक’ ही असुरक्षित: 9 महीने में 157 बड़े अफसरों से ₹117 करोड़ की साइबर ठगी
चंडीगढ़ | पंजाब में कानून व्यवस्था और सुरक्षा की कमान संभालने वाले प्रशासनिक अधिकारी ही अब साइबर अपराधियों के रडार पर हैं। पिछले 9 महीनों के चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं, जिसमें IAS, IPS और सैन्य अधिकारियों समेत 157 आला अफसरों को डिजिटल ठगों ने अपना शिकार बनाया है। ठगी की कुल रकम 117 करोड़ रुपये से अधिक बताई जा रही है।
केंद्र ने जारी किया ‘हाई रिस्क जोन’ अलर्ट
साइबर अपराध के बढ़ते ग्राफ और वीआईपी (VIP) टारगेट को देखते हुए केंद्रीय गृह मंत्रालय ने पंजाब को “हाई रिस्क जोन” की श्रेणी में डाल दिया है। राज्य सरकार को भेजे गए अलर्ट में केंद्र ने साइबर सुरक्षा तंत्र को और अधिक मजबूत करने के निर्देश दिए हैं।
लालच और डर का घातक मेल
इस मामले का सबसे हैरान करने वाला पहलू यह है कि ठगी का शिकार हुए 157 अफसरों में से 128 ऐसे हैं, जो कम समय में पैसा दोगुना करने के लालच में फंस गए। ठगों ने इन अधिकारियों को निशाना बनाने के लिए मुख्य रूप से तीन तरीकों का इस्तेमाल किया:
शेयर मार्केट और निवेश: भारी मुनाफे का झांसा देकर छोटी रकम से भरोसा जीता और फिर करोड़ों का निवेश कराया।
डिजिटल अरेस्ट: जांच एजेंसियों का डर दिखाकर अधिकारियों को घंटों वीडियो कॉल पर रखा और फिर जबरन फंड ट्रांसफर कराए।
टारगेटेड नेटवर्क: ठगों ने बाकायदा अफसरों की प्रोफाइलिंग की और उनके वित्तीय व्यवहार को जानकर उन्हें जाल में फंसाया।
प्रशासनिक नींव हिली, सुसाइड तक की आई नौबत
हाल ही में पंजाब के एक पूर्व आईजी (IG) रैंक के अधिकारी द्वारा ठगी के बाद आत्महत्या के प्रयास ने पूरे देश को हिला दिया था। अधिकारियों के इस तरह शिकार होने से राज्य के प्रशासनिक तंत्र में डर और असुरक्षा का माहौल है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इतने शिक्षित और पावरफुल लोग ठगे जा रहे हैं, तो आम जनता की सुरक्षा भगवान भरोसे है।
”ठगों का नेटवर्क कई राज्यों और विदेशों तक फैला है। वे अधिकारियों की साख और उनके पद का मनोवैज्ञानिक लाभ उठाते हैं।” — साइबर एक्सपर्ट
सावधान रहें, सुरक्षित रहें
साइबर सेल ने फिर से आगाह किया है कि:
कोई भी सरकारी एजेंसी ‘डिजिटल अरेस्ट’ नहीं करती।
व्हाट्सएप ग्रुप पर मिलने वाले ‘इन्वेस्टमेंट टिप्स’ से बचें।
धोखाधड़ी होने पर तुरंत 1930 पर कॉल करें।

