मैकल के पहाड़ों पर माफिया का ‘खूनी’ कब्ज़ा: सच दिखाने पर पत्रकार को मिली लहू से सनी धमकीअमरकंटक/पेण्ड्रारोड:
छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश की सीमाओं को जोड़ने वाली पवित्र मैकल की पहाड़ियाँ आज अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए नहीं, बल्कि खनन माफिया के खौफनाक तांडव के लिए सुर्खियों में हैं। अमरकंटक बायोस्फियर रिज़र्व, जहाँ से नर्मदा जैसी जीवनदायिनी नदियाँ निकलती हैं, उसे माफिया के लोभ ने छलनी कर दिया है। लेकिन हद तब हो गई जब इस काले साम्राज्य की सच्चाई दिखाने गए लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पर जानलेवा हमला किया गया।
लोहे की रॉड से दबाई जा रही सच की आवाज़
अवैध उत्खनन की कवरेज करने पहुंचे निर्भीक पत्रकार सुशांत गौतम पर खनन माफियाओं ने कायराना हमला किया। कैमरों को तोड़ने और सच को दफन करने की नीयत से आए हमलावरों ने लोहे की रॉड से पत्रकार का लहू बहा दिया। यह हमला केवल एक पत्रकार पर नहीं, बल्कि संविधान द्वारा दी गई अभिव्यक्ति की आजादी पर है। वरिष्ठ पत्रकारों ने इस घटना पर रोष जताते हुए सवाल पूछा है— “क्या अब सच बोलने की कीमत शहादत से चुकानी होगी?”
नामजद FIR, फिर भी प्रशासन नतमस्तक?
इस मामले में पुलिस ने FIR क्रमांक 0014/2026 दर्ज की है, जिसमें जयप्रकाश शिवदासानी, सुधीर बाली और लल्लन तिवारी को मुख्य आरोपी बनाया गया है। हैरानी की बात यह है कि नामजद एफआईआर होने के बावजूद आरोपियों की बेखौफ मौजूदगी प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करती है।
सवाल: क्या माफिया के हौसले इतने बुलंद हैं कि उन्हें कानून का डर नहीं?
सवाल: क्या प्रशासन की चुप्पी किसी बड़ी मिलीभगत का इशारा है?
पहाड़ निगल रहा माफिया, मौन है सत्ता
अमरकंटक का यह संरक्षित क्षेत्र पर्यावरण की दृष्टि से बेहद संवेदनशील है। यहाँ मशीनों की गूँज और पहाड़ों का सीना चीरते माफिया ने पूरे इकोसिस्टम को खतरे में डाल दिया है। जब रक्षक ही भक्षक बन जाएं या मौन साध लें, तब “बंदूक” कानून की सीमाएं तय करने लगती है।
“कलम झुकेगी नहीं”— पत्रकार का संकल्प
अस्पताल के बिस्तर से लहू से लथपथ सुशांत गौतम का एक ही संदेश है— “कलम झुकेगी नहीं।” इस हमले के बाद अब पत्रकारों और क्षेत्रीय जनता ने आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है। सवाल अब भी वही खड़ा है: क्या सरकार इन सफेदपोश अपराधियों पर नकेल कसेगी या मैकल के पहाड़ों को माफिया की भेंट चढ़ने देगी?

