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रामानुजगंज में गणतंत्र दिवस की वर्षों पुरानी परंपरा पर संशय, हाई स्कूल मैदान में कार्यक्रम न होने की आशंका

रामानुजगंज।
26 जनवरी गणतंत्र दिवस के अवसर पर हर वर्ष हाई स्कूल मैदान में आयोजित होने वाला मुख्य कार्यक्रम इस वर्ष नहीं होने की प्रबल संभावना जताई जा रही है। विश्वस्त सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, इस बार गणतंत्र दिवस का आयोजन परंपरागत रूप से हाई स्कूल ग्राउंड में नहीं किया जाएगा। यदि ऐसा होता है, तो यह वर्षों से चली आ रही एक महत्वपूर्ण परंपरा के टूटने जैसा होगा।

अब तक इस संबंध में प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक स्थिति स्पष्ट नहीं की गई है। ऐसे में यह सवाल उठ रहा है कि आखिर इस निर्णय के पीछे कारण क्या है। क्या यह तकनीकी समस्या है, आर्थिक कारण हैं या कोई अन्य प्रशासनिक बाधा। स्थानीय नागरिकों का मानना है कि यदि समय रहते प्रशासन स्थिति स्पष्ट करता है, तो इस परंपरा को बचाने के लिए सामूहिक प्रयास किए जा सकते हैं।

गौरतलब है कि गणतंत्र दिवस केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि राष्ट्रीय अस्मिता और गरिमा से जुड़ा पर्व है। इसे हर स्तर पर सम्मानपूर्वक और निरंतर मनाया जाना हम सभी का मूल कर्तव्य है। रामानुजगंज इस जिले का अभिन्न अंग है और यहां जिला स्तरीय महत्व के कार्यक्रमों की परंपरा रही है। ऐसे में केवल जिला मुख्यालय तक कार्यक्रमों को सीमित करना स्थानीय स्तर पर उचित नहीं माना जा रहा।

अब तक की व्यवस्था के अनुसार, नगर के ऐतिहासिक गांधी मैदान में नगर पालिका परिषद द्वारा ध्वजारोहण किया जाता रहा है। इसके उपरांत अनुभागीय विभाग के तत्वावधान में हाई स्कूल मैदान में सांस्कृतिक कार्यक्रम और झांकियों का भव्य आयोजन होता था, जिसमें नगर और आसपास के विद्यालयों के विद्यार्थी और शिक्षक सक्रिय रूप से भाग लेते थे। यह कार्यक्रम बच्चों की प्रतिभा, सांस्कृतिक विविधता और राष्ट्रीय भावना को मंच प्रदान करता था।

सूत्रों के अनुसार, इस वर्ष भी नगर पालिका परिषद द्वारा गांधी मैदान में ध्वजारोहण कार्यक्रम पूर्ववत आयोजित किए जाने की सूचना है। साथ ही यह संभावना भी व्यक्त की जा रही है कि गांधी मैदान में ही सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति कराई जा सकती है। हालांकि, हाई स्कूल मैदान में होने वाले व्यापक सांस्कृतिक आयोजन और झांकियों को लेकर स्थिति अब भी स्पष्ट नहीं है।

स्थानीय नागरिकों और प्रबुद्ध वर्ग की ओर से प्रशासन से मांग की जा रही है कि वह इस विषय पर पुनर्विचार करे और विवेकपूर्ण निर्णय लेते हुए यह सुनिश्चित करे कि गणतंत्र दिवस से जुड़ी वर्षों पुरानी परंपरा अनवरत बनी रहे। अब यह देखना शेष है कि जिला प्रशासन और क्षेत्र के जिम्मेदार नागरिक इस मुद्दे का समाधान निकाल पाते हैं या नहीं।

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