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बलरामपुर पुलिस को बड़ी सफलता: सेंदूर नदी में मिले CAF जवान के अंधे कत्ल की गुत्थी सुलझी, पत्नी और प्रेमी गिरफ्तार

बलरामपुर | छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले में सेंदूर नदी के किनारे रेत में दबे मिले अज्ञात शव के सनसनीखेज मामले का पुलिस ने पर्दाफाश कर दिया है। हत्या की शिकार कोई और नहीं बल्कि छत्तीसगढ़ सशस्त्र बल (CAF) के प्रधान आरक्षक विश्वनाथ केरकेट्टा थे। पुलिस ने इस मामले में मृतक की पत्नी और उसके प्रेमी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है।

रेत में दबी मिली थी लाश
ग्राम सतिसेमर के पास सेंदूर नदी की रेत में एक अज्ञात शव मिलने से इलाके में सनसनी फैल गई थी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि मृतक के सिर पर गंभीर चोट पहुंचाकर उसकी हत्या की गई है। जांच के दौरान मृतक की पहचान विश्वनाथ केरकेट्टा (51 वर्ष) के रूप में हुई, जो दंतेवाड़ा में प्रधान आरक्षक के पद पर पदस्थ थे।

अवैध संबंधों ने ली जान
पुलिस अधीक्षक वैभव बैंकर के निर्देश पर गठित विशेष टीम और साइबर सेल की जांच में यह बात सामने आई कि मामला अवैध संबंधों से जुड़ा है। मृतक की दूसरी पत्नी, कलास्टिका केरकेट्टा का फेसबुक के माध्यम से विवेक टोप्पो नामक युवक से प्रेम संबंध शुरू हुआ था। दोनों ने गुपचुप तरीके से शादी भी कर ली थी। जब विश्वनाथ को इस बात की भनक लगी, तो घर में विवाद शुरू हो गया।

साजिश के तहत बुलावा और खौफनाक अंत
पुलिस के अनुसार, कलास्टिका और विवेक ने मिलकर विश्वनाथ को रास्ते से हटाने की योजना बनाई।

14 जनवरी 2026: छुट्टी पर आए विश्वनाथ को विवेक ने मैसेज कर नदी किनारे बुलाया।

वारदात: वहां विवेक ने लोहे की खुरपी से सिर पर ताबड़तोड़ वार कर उसकी हत्या कर दी और शव को रेत में गाड़ दिया।

गुमराह करने की कोशिश: आरोपी पत्नी रायपुर में रहकर नाटक करती रही और 22 जनवरी को वापस आकर पति की तलाश का ढोंग करने लगी।

तकनीकी साक्ष्यों से खुला राज
अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक विश्वदीपक त्रिपाठी के नेतृत्व में टीम ने मोबाइल कॉल डिटेल और सोशल मीडिया गतिविधियों की बारीकी से जांच की। पुलिस ने कड़ाई से पूछताछ की तो आरोपियों ने अपना जुर्म कबूल कर लिया। आरोपियों के पास से मृतक का मोबाइल, पैन कार्ड और अन्य दस्तावेज भी बरामद किए गए हैं।

पुलिस का बयान: “आरोपी विवेक टोप्पो (31) और कलास्टिका केरकेट्टा (31) को गिरफ्तार कर 3 फरवरी को न्यायालय में पेश किया गया, जहाँ से उन्हें जेल भेज दिया गया है। इस अपराध ने न केवल एक हंसते-खेलते परिवार को उजाड़ दिया, बल्कि बच्चों और बुजुर्गों के भविष्य पर भी प्रश्नचिह्न लगा दिया है।”

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