बस्तर में नक्सलवाद के खात्मे की डेडलाइन पर ऐतिहासिक सफलता, 25 नक्सलियों का आत्मसमर्पण
बीजापुर – छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित बीजापुर जिले में सुरक्षा बलों को एक ऐतिहासिक और निर्णायक सफलता मिली है। ‘नक्सल मुक्त बस्तर’ के सरकारी संकल्प की तय समय-सीमा के अंतिम दिन, दण्डकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी (DKSZC) से जुड़े 25 खूंखार माओवादी कैडरों ने हिंसा का मार्ग त्यागकर मुख्यधारा में वापसी की है।
इनामी नक्सलियों ने डाला हथियार

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, आत्मसमर्पण करने वाले इन 25 नक्सलियों पर कुल 1.47 करोड़ रुपये का इनाम घोषित था। इन कैडरों में संगठन के कई वरिष्ठ पदाधिकारी शामिल हैं, जिनमें मंगल कोरसा उर्फ मोटू, आकाश उर्फ फागु उईका, डीवीसीएम शंकर मुचाकी, राजू रैयाम उर्फ मुन्ना और पाले कुरसम जैसे नाम प्रमुख हैं। इन सभी नक्सलियों के खिलाफ क्षेत्र में कई बड़ी हिंसक घटनाओं में शामिल होने के गंभीर आरोप दर्ज थे।
इतिहास की सबसे बड़ी बरामदगी
सुरक्षा बलों की यह कार्रवाई केवल आत्मसमर्पण तक सीमित नहीं रही, बल्कि माओवादी संगठन के अब तक के सबसे बड़े ‘खजाने’ पर भी प्रहार किया गया है। आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों की निशानदेही पर जवानों ने:
- 7.2 किलोग्राम सोना (बाजार मूल्य लगभग 11.16 करोड़ रुपये)
- 2.90 करोड़ रुपये नकद
- 93 घातक हथियार (जिनमें AK-47, LMG, SLR और INSAS राइफलें शामिल हैं) बरामद किए हैं।
कुल बरामदगी की कीमत 14.06 करोड़ रुपये से अधिक आंकी गई है, जिसे नक्सल विरोधी अभियानों में अब तक की सबसे बड़ी आर्थिक चोट माना जा रहा है।
पुनर्वास के लिए प्रशासन का संकल्प
बस्तर रेंज के आईजी सुंदरराज पी. ने इस सफलता को ‘पूना मारगेम’ (पुनर्वास से पुनर्जीवन) पहल की बड़ी जीत बताया है। उन्होंने कहा कि मुख्यधारा में लौटे सभी कैडरों को छत्तीसगढ़ शासन की पुनर्वास नीति के तहत आर्थिक सहायता, कौशल विकास प्रशिक्षण, आवास और सम्मानजनक रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जाएंगे।
‘नक्सल मुक्त’ की दिशा में बढ़ता बस्तर
बीजापुर के पुलिस अधीक्षक डॉ. जितेंद्र कुमार यादव ने बताया कि 1 जनवरी 2024 से 31 मार्च 2026 तक अकेले बीजापुर जिले में 1003 माओवादी कैडर आत्मसमर्पण कर चुके हैं। अब तक कुल 19.43 करोड़ रुपये की संपत्ति बरामद की जा चुकी है, जो माओवादी तंत्र के पूरी तरह पतन की ओर बढ़ने का स्पष्ट संकेत है। सुरक्षा बलों ने अभी भी जंगलों में सक्रिय शेष माओवादियों से हिंसा छोड़कर शांति के मार्ग पर लौटने की अपील की है।
