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भानुप्रतापपुर में लोक स्वराज यात्रा का स्वागत, ज्ञान केंद्र स्थापना पर हुई महत्वपूर्ण बैठक

दिनांक 15 मार्च 2026 को ज्ञान यज्ञ परिवार की लोक स्वराज यात्रा, जिसका उद्देश्य देशभर में ज्ञान केंद्रों की स्थापना करना है, भानुप्रतापपुर पहुँची। शहर के स्थानीय गणमान्य नागरिकों ने यात्रा का आत्मीय स्वागत किया। इस अवसर पर संस्थान के पुराने साथी और मुनि जी से जुड़े हुए वैद्यराज आहूजा जी की विशेष अगुवाई रही।

उनके नेतृत्व में जैन भवन, भानुप्रतापपुर में शाम 6:00 बजे से ज्ञान केंद्र स्थापना को लेकर एक बैठक आयोजित की गई, जिसमें शहर के 22 गणमान्य सम्मानित नागरिक एवं मीडिया के साथी उपस्थित हुए। स्थानीय नागरिकों की ओर से बैठक में आए सभी अतिथियों के लिए जलपान की भी व्यवस्था की गई थी।

बैठक के दौरान सुप्रसिद्ध मौलिक विचारक बजरंग मुनि जी के “समाज सर्वोच्च” के सिद्धांत पर भी विस्तार से चर्चा हुई। उपस्थित सभी साथियों ने इस विचार के प्रति अपना विश्वास व्यक्त करते हुए कहा कि समाज की शक्ति और सामूहिक चेतना ही किसी भी सकारात्मक परिवर्तन की आधारशिला होती है। प्रतिभागियों ने माना कि यदि समाज को सर्वोच्च मानकर परिवार, विचार और व्यवस्था के स्तर पर कार्य किया जाए तो सामाजिक समरसता, जिम्मेदारी और सहयोग की भावना को नई दिशा मिल सकती है।

बैठक में ज्ञान केंद्रों के महत्व, समाज में उनकी उपयोगिता, संवैधानिक व्यवस्था परिवर्तन, सामाजिक व्यवस्था परिवर्तन तथा वैचारिक व्यवस्था परिवर्तन जैसे विषयों पर स्वराज यात्री संजय तिवारी जी के सानिध्य में गहन चर्चा हुई। उपस्थित साथियों ने समाज में वैचारिक संवाद को सशक्त बनाने के लिए ज्ञान केंद्रों की स्थापना को महत्वपूर्ण बताया।

बैठक के पश्चात सभी अतिथियों को ज्ञान तत्व विशेषांक सहित संस्थान द्वारा प्रकाशित अन्य पुस्तकें भेंट की गईं। साथ ही उपस्थित नागरिकों ने ज्ञान तत्व पत्रिका की सदस्यता लेने में भी अपनी रुचि व्यक्त की।

इस बैठक में अनंत गोपाल केसरी जी, नरेश कुमार जी, नरोत्तम सिंह चौहान जी, राजकुमार दुबे जी, सुरेश जी, राकेश तिवारी जी, दीपक कुमार जी, राकेश जी, प्रदीप जी, लक्ष्मण मखीजा जी, आनंद जैन जी, रमेश तिवारी जी, यश कटारिया जी, गौरव जी, हरीश जी एवं लक्ष्मण जी सहित शहर के अन्य गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

इस अवसर पर हमारे साथी अनोखे लाल जी ने लोक स्वराज की अवधारणा पर विस्तार से प्रकाश डाला तथा परिवार सशक्तिकरण के संबंध में मुनि जी के सुझावों से भी उपस्थित लोगों को अवगत कराया। चर्चा और बैठक अत्यंत सार्थक एवं प्रेरणादायी रही।

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