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बड़ी खबर: दुर्गम इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं की मिसाल, मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी के तीन स्वास्थ्य केंद्रों को मिला ‘राष्ट्रीय सम्मान’

​राजनांदगांव/मोहला-मानपुर | [आज की तिथि]​छत्तीसगढ़ के सुदूर वनांचल और दुर्गम इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता ने आज एक नया इतिहास रच दिया है। मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी जिले के तीन स्वास्थ्य संस्थानों को उनके उत्कृष्ट प्रदर्शन और बेहतर सुविधाओं के लिए भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा राष्ट्रीय गुणवत्ता आश्वासन मानक (NQAS) प्रमाण पत्र से नवाजा गया है।
​इन केंद्रों ने फहराया सफलता का परचम
​भारत सरकार द्वारा जारी मूल्यांकन रिपोर्ट के अनुसार, जिले के निम्नलिखित केंद्रों ने कड़े मानकों पर खरा उतरते हुए यह उपलब्धि हासिल की है:
​प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC), दनगढ़
​आयुष्मान आरोग्य मंदिर, चिखली
​आयुष्मान आरोग्य मंदिर, केवट टोली
​कड़े परीक्षण के बाद मिली मान्यता
​राष्ट्रीय गुणवत्ता आश्वासन मानक (NQAS) प्रमाण पत्र प्राप्त करना किसी भी स्वास्थ्य संस्थान के लिए एक बड़ी चुनौती होती है। केंद्रीय टीम द्वारा इन केंद्रों का बारीकी से निरीक्षण किया गया था, जिसमें मुख्य रूप से:
​उपचार की गुणवत्ता: मरीजों को दी जाने वाली चिकित्सीय सेवाएं।
​संक्रमण नियंत्रण: अस्पताल परिसर में स्वच्छता और बायो-मेडिकल वेस्ट का निपटारा।
​बुनियादी ढांचा: ओपीडी, लेबर रूम और दवाओं की उपलब्धता।
​मरीजों का फीडबैक: इलाज के दौरान मरीजों को मिलने वाली संतुष्टि और व्यवहार।
​विकास की दिशा में मील का पत्थर
​जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने इसे एक बड़ी उपलब्धि बताया है। जानकारों का कहना है कि वनांचल क्षेत्र होने के बावजूद, इन केंद्रों में राष्ट्रीय स्तर की सुविधाएं सुनिश्चित करना यह दर्शाता है कि शासन की योजनाएं जमीनी स्तर पर प्रभावी ढंग से पहुंच रही हैं।
​”यह सम्मान हमारे जमीनी स्तर के स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं की कड़ी मेहनत का परिणाम है। अब इन केंद्रों को केंद्र सरकार से अतिरिक्त प्रोत्साहन राशि मिलेगी, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक सुदृढ़ बनाया जा सकेगा।”
— स्थानीय स्वास्थ्य अधिकारी
​ग्रामीणों को मिलेगा सीधा लाभ
​इस प्रमाणन के बाद अब स्थानीय ग्रामीणों को अपने ही क्षेत्र में बेहतर और गुणवत्तापूर्ण इलाज की गारंटी मिलेगी। इससे न केवल बड़े शहरों के अस्पतालों पर दबाव कम होगा, बल्कि मातृ-शिशु मृत्यु दर में कमी लाने और गंभीर बीमारियों के समय पर उपचार में भी मदद मिलेगी।

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