National NewsChhattisgarhCrime & LawEconomy

छत्तीसगढ़ में धर्मांतरण पर ‘सर्जिकल स्ट्राइक’: बजट सत्र में आएगा नया सख्त कानून, 14 साल की सजा का प्रावधान

रायपुर | 21 फरवरी, 2026 छत्तीसगढ़ की साय सरकार प्रदेश में अवैध धर्मांतरण के नेटवर्क को पूरी तरह ध्वस्त करने के लिए देश का सबसे सख्त कानून लाने जा रही है। विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने पुष्टि की है कि आगामी बजट सत्र में ‘छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य विधेयक 2026’ पेश किया जाएगा। इस नए कानून के जरिए सरकार उन तमाम कानूनी छिद्रों (loop-holes) को बंद करने की तैयारी में है, जिनका फायदा उठाकर दशकों से बस्तर और जशपुर जैसे आदिवासी अंचलों में धर्मांतरण का खेल चल रहा था।
52 बैठकों के बाद तैयार हुआ ‘महा-ड्राफ्ट’
गृहमंत्री विजय शर्मा के नेतृत्व में इस विधेयक को अंतिम रूप देने के लिए गहन विमर्श किया गया है। सूत्रों के मुताबिक, पिछले 8 महीनों में करीब 52 बैठकें आयोजित की गईं। पहले इस कानून में 20 वर्ष की सजा का प्रस्ताव था, जिसे उप-मंत्री परिषद की समीक्षा के बाद अब 14 साल की जेल और भारी जुर्माने के प्रावधान के साथ पेश किया जा रहा है।

‘विश्वासियो’ और ‘छद्म धर्मांतरण’ पर नकेल
विधेयक का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा ‘छद्म धर्मांतरण’ (Crypto-Conversion) को रोकना है। अक्सर मिशनरी आदिवासियों को खुद को आधिकारिक तौर पर ईसाई बताने के बजाय ‘विश्वासी’ बताने के लिए प्रेरित करते हैं, ताकि वे जाति आधारित आरक्षण और सरकारी लाभ लेते रहें।
• नया नियम: अब प्रथा और परंपराओं की अवहेलना करने पर धर्मांतरण को छिपाना आसान नहीं होगा।
• स्पष्ट परिभाषा: वैध और अवैध धर्मांतरण के बीच की रेखा को पूरी तरह स्पष्ट कर दिया गया है।
• सूचना अवधि: धर्म परिवर्तन करने से पहले जिला प्रशासन को 60 दिन पूर्व सूचना देना अनिवार्य हो सकता है।

2006 का विधिक पेंच हुआ खत्म
धर्मांतरण कानून को लेकर छत्तीसगढ़ में लंबे समय से विधिक गतिरोध था। 2006 में डॉ. रमन सिंह सरकार ने एक विधेयक पारित किया था, जो राष्ट्रपति के पास लंबित रह गया था। नियमतः, जब तक पुराना विधेयक वापस न आए, नया कानून नहीं बनाया जा सकता था।
अक्टूबर 2025 में राष्ट्रपति भवन से पुराने विधेयक की वापसी ने साय सरकार के लिए नए और व्यापक कानून का रास्ता साफ कर दिया है।
सुरक्षा के कड़े घेरे (Cross-Check Points)
विधेयक में इस बात का भी ख्याल रखा गया है कि कोई निजी स्वार्थ या झूठी शिकायतों के जरिए निर्दोषों को परेशान न कर सके। इसके लिए प्रशासन स्तर पर ‘क्रॉस-चेक’ के कड़े बैरियर बनाए गए हैं। यदि जांच में शिकायत झूठी पाई जाती है, तो शिकायतकर्ता पर भी सख्त कार्यवाही होगी।
बजट सत्र के अन्य मुख्य आकर्षण
धर्मांतरण विधेयक के साथ-साथ सरकार ‘छत्तीसगढ़ लोक सुरक्षा (उपाय) प्रवर्तन विधेयक’ भी पेश करेगी, जो राज्य की आंतरिक सुरक्षा और सार्वजनिक व्यवस्था को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से लाया जा रहा है। 23 फरवरी से शुरू हो रहे इस सत्र में 24 फरवरी को वित्त मंत्री ओपी चौधरी बजट पेश करेंगे, जिस पर पूरे प्रदेश की नजरें टिकी हुई हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *