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दिल्ली: डिजिटल अरेस्ट का खौफनाक जाल, NRI डॉक्टर दंपति से ₹14.85 करोड़ की महाठगी

राजधानी दिल्ली के पॉश इलाके ग्रेटर कैलाश-II से साइबर अपराध का एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने सुरक्षा एजेंसियों के भी होश उड़ा दिए हैं। अमेरिका में करीब 48 वर्षों तक संयुक्त राष्ट्र (UN) में सेवा देने के बाद भारत लौटे एक बुजुर्ग एनआरआई डॉक्टर दंपति को ठगों ने 17 दिनों तक ‘डिजिटल अरेस्ट’ में रखा और उनके जीवन भर की कमाई—14 करोड़ 85 लाख रुपये—साफ कर दिए।

24 दिसंबर से शुरू हुआ मानसिक प्रताड़ना का खेल

ठगी की यह पटकथा 24 दिसंबर को शुरू हुई, जब 77 वर्षीय डॉ. इंदिरा तनेजा को एक कॉल आया। कॉल करने वाले ने खुद को टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया (TRAI) का अधिकारी बताया। उसने दावा किया कि उनके नाम पर जारी एक सिम कार्ड से अश्लील सामग्री भेजी जा रही है और उनके खिलाफ मुंबई में मनी लॉन्ड्रिंग (PMLA) का गंभीर केस दर्ज है।

वीडियो कॉल पर ‘डिजिटल जेल’

दंपति को डराने के लिए ठगों ने ‘डिजिटल अरेस्ट’ का सहारा लिया। उन्होंने डॉ. तनेजा और उनके पति डॉ. ओम तनेजा को स्काइप वीडियो कॉल पर चौबीसों घंटे निगरानी में रखा।

  • निगरानी: ठगों ने आदेश दिया कि वे कैमरा बंद नहीं करेंगे और न ही किसी को इस ‘गोपनीय जांच’ के बारे में बताएंगे।
  • साजिश: जब भी डॉ. इंदिरा बैंक जाने के लिए घर से निकलतीं, ठग उनके बीमार पति के फोन पर वीडियो कॉल शुरू कर देते ताकि महिला कहीं पुलिस या पड़ोसियों से मदद न मांग सके।

बैंक मैनेजर के लिए पहले से तैयार थी ‘स्क्रिप्ट’

हैरानी की बात यह है कि ठगों ने डॉ. इंदिरा को बैंक में बोलने के लिए एक झूठी कहानी रटवा दी थी। जब बैंक मैनेजर ने इतनी बड़ी रकम (एक बार में ₹2 करोड़ से अधिक) ट्रांसफर करने पर सवाल उठाया, तो उन्होंने वही स्क्रिप्ट दोहरा दी जो ठगों ने उन्हें सिखाई थी। इस तरह 8 अलग-अलग किस्तों में कुल 14.85 करोड़ रुपये ठगों के खातों में ट्रांसफर कर दिए गए।

थाने में हुआ खुलासा, पुलिस से भी की बदतमीजी

ठगी का खुलासा तब हुआ जब 10 जनवरी को ठगों ने ही उन्हें ‘रिलीज ऑर्डर’ लेने के लिए स्थानीय थाने जाने को कहा। डॉ. इंदिरा जब थाने पहुंचीं, तब भी वे ठगों के साथ वीडियो कॉल पर थीं। जब पुलिस अधिकारियों ने संदेह होने पर फोन लिया, तो ठगों ने पुलिसकर्मियों के साथ भी बेहद बदतमीजी की और कॉल काट दिया। तब जाकर बुजुर्ग दंपति को समझ आया कि वे एक बड़े अंतरराष्ट्रीय गिरोह का शिकार हो चुके हैं।

स्पेशल सेल को सौंपी गई जांच

दंपति इस समय गहरे सदमे में है। मामले की गंभीरता और रकम की विशालता को देखते हुए दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल (IFSO यूनिट) को जांच सौंपी गई है। शुरुआती जांच में पता चला है कि पैसे कई लेयर्स में अलग-अलग ‘म्यूल अकाउंट्स’ में भेजे गए हैं।


सावधान रहें: ‘डिजिटल अरेस्ट’ पूरी तरह से गैरकानूनी और फर्जी है। कोई भी सरकारी संस्था वीडियो कॉल पर आपको गिरफ्तार नहीं करती है। यदि आपके साथ ऐसा हो, तो तुरंत 1930 पर कॉल करें।

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