दिल्ली दंगे केस: जोहरान मामदानी के समर्थन पत्र के बीच सुप्रीम कोर्ट सख़्त, उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत ख़ारिज
नई दिल्ली। 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों से जुड़े तथाकथित “लार्जर कांस्पिरेसी” मामले में Supreme Court of India ने सोमवार को अहम फैसला सुनाते हुए सात अभियुक्तों में से पाँच को सशर्त जमानत दे दी, जबकि दो प्रमुख आरोपियों — Umar Khalid और Sharjeel Imam — की जमानत याचिकाएँ खारिज कर दीं। यह फैसला ऐसे समय आया है, जब न्यूयॉर्क के विधायक Zohran Mamdani ने उमर खालिद के समर्थन में सार्वजनिक रूप से एक पत्र लिखा था।
सुप्रीम कोर्ट की सख़्त टिप्पणी
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अभियोजन रिकॉर्ड के अनुसार उमर खालिद और शरजील इमाम की भूमिका केवल सहायक नहीं, बल्कि “central and formative” बताई गई है। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि UAPA के तहत दर्ज आरोपों की गंभीरता को देखते हुए उनके ख़िलाफ़ प्रथम दृष्टया मामला बनता है, इसलिए उन्हें अन्य सह-अभियुक्तों के समान राहत नहीं दी जा सकती।
पाँच आरोपियों को सशर्त जमानत
इसी मामले में पाँच अन्य आरोपियों को कड़ी शर्तों के साथ जमानत दी गई। अदालत ने साफ किया कि यह राहत आरोपों को हल्का नहीं करती, बल्कि संबंधित अभियुक्तों की अपेक्षाकृत सीमित भूमिका और व्यक्तिगत परिस्थितियों को ध्यान में रखकर दी गई है।
जोहरान मामदानी का पत्र और विदेशी समर्थन
गौरतलब है कि इससे पहले अमेरिका के कुछ सांसदों के साथ-साथ न्यूयॉर्क के विधायक जोहरान मामदानी ने उमर खालिद के समर्थन में एक पत्र लिखा था, जिसमें लंबी न्यायिक हिरासत पर चिंता जताई गई थी। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में इस पत्र या किसी विदेशी समर्थन का प्रत्यक्ष उल्लेख नहीं किया, लेकिन फैसले की भाषा से यह स्पष्ट है कि अदालत ने केवल रिकॉर्ड पर मौजूद साक्ष्यों और भारतीय क़ानून के प्रावधानों के आधार पर निर्णय लिया।
एक वर्ष तक नई जमानत याचिका पर रोक
कोर्ट ने अपने आदेश में यह भी कहा कि उमर खालिद और शरजील इमाम अगले एक वर्ष तक नई जमानत याचिका दाखिल नहीं कर सकेंगे। केवल संरक्षित गवाहों की जिरह पूरी होने के बाद सीमित परिस्थितियों में पुनर्विचार की अनुमति का विकल्प छोड़ा गया है।
राजनीतिक और सार्वजनिक संदेश
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, यह फैसला उन राजनीतिक दलों और सार्वजनिक हस्तियों के लिए भी संकेत है जो दिल्ली दंगों के अभियुक्तों के पक्ष में बयान देते रहे हैं। अदालत ने दो टूक कहा कि जमानत का प्रश्न किसी समर्थन पत्र या राजनीतिक दबाव से नहीं, बल्कि अभियुक्त की भूमिका और साक्ष्यों की कसौटी पर तय होगा।
उल्लेखनीय है कि फरवरी 2020 में हुए Delhi Riots 2020 में 53 लोगों की मौत हुई थी और सैकड़ों लोग घायल हुए थे। यह मामला अब भी न्यायिक प्रक्रिया में है और सुप्रीम कोर्ट का यह ताज़ा आदेश इसकी आगे की दिशा तय करने वाला माना जा रहा है।
