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छत्तीसगढ़ के सुदूर वनांचलों में डिजिटल क्रांति: 5000 मोबाइल टावरों से महकेगा बस्तर और सरगुजा

रायपुर। छत्तीसगढ़ की विष्णु देव साय सरकार राज्य के सुदूर और दुर्गम इलाकों की तस्वीर बदलने के लिए एक बड़ी डिजिटल मुहिम शुरू करने जा रही है। प्रदेश के उन गांवों में, जहां आज भी मोबाइल सिग्नल के लिए ग्रामीणों को ऊंचे पहाड़ों या पेड़ों पर चढ़ना पड़ता है, वहां अब 5,000 नए मोबाइल टावर लगाए जाएंगे। इस पहल का मुख्य उद्देश्य बस्तर और सरगुजा जैसे संभागों के अंतिम छोर पर बैठे व्यक्ति को डिजिटल मुख्यधारा से जोड़ना है।

कनेक्टिविटी की नई परिभाषा

​राज्य सरकार की इस योजना के तहत केंद्र सरकार ने ₹3,942 करोड़ का बड़ा बजट स्वीकृत किया है। इसके माध्यम से प्रदेश की 11,682 ग्राम पंचायतों को हाई-स्पीड ऑप्टिकल फाइबर से जोड़ा जाएगा। नेटवर्क को सुरक्षित रखने के लिए ‘रिंग टोपोलॉजी’ तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है, ताकि तकनीकी खराबी के दौरान भी सेवाएं बाधित न हों।

ग्रामीण जीवन में आएगा बड़ा बदलाव

​इस डिजिटल विस्तार से छत्तीसगढ़ के ग्रामीण क्षेत्रों में क्रांतिकारी परिवर्तन देखने को मिलेंगे:

  • ई-गवर्नेंस: ग्रामीणों को अब सरकारी दस्तावेजों और योजनाओं के लाभ के लिए शहर जाने की जरूरत नहीं होगी। ई-डिस्ट्रिक्ट 2.0 के जरिए 250 से अधिक सेवाएं सीधे उनके मोबाइल पर उपलब्ध होंगी।
  • शिक्षा और स्वास्थ्य: सुदूर अंचलों के छात्र अब ऑनलाइन कक्षाओं से जुड़ सकेंगे। वहीं, गंभीर बीमारियों की स्थिति में ‘टेलीमेडिसिन’ के जरिए विशेषज्ञ डॉक्टरों से वीडियो कॉल पर परामर्श लिया जा सकेगा।
  • सुरक्षा और विकास: नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में बेहतर मोबाइल नेटवर्क से न केवल सुरक्षा बलों को मदद मिलेगी, बल्कि विकास कार्यों की मॉनिटरिंग भी आसान हो जाएगी।

मुख्यमंत्री का संकल्प

​मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने स्पष्ट किया है कि उनकी सरकार का लक्ष्य “अंत्योदय” है। उन्होंने कहा कि डिजिटल कनेक्टिविटी केवल एक तकनीक नहीं, बल्कि विकसित छत्तीसगढ़ की नई जीवन रेखा है। इस परियोजना के पूरा होने से छत्तीसगढ़ देश के सबसे अग्रणी डिजिटल राज्यों में शुमार हो जाएगा।

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