Global NewsWorld Politics

ड्रैगन के बदले सुर: मिडिल ईस्ट संकट के बीच चीन ने भारत को बताया ‘साझेदार’, दुश्मनी छोड़ दोस्ती का दांव

बीजिंग/नई दिल्ली: दुनिया भर में जारी युद्ध और अस्थिरता के बीच एशिया की दो महाशक्तियों—भारत और चीन—के रिश्तों में बर्फ पिघलती नजर आ रही है। चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने हाल ही में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में भारत के प्रति बेहद सकारात्मक रुख अपनाते हुए ‘दुश्मनी छोड़ो, दोस्ती करो’ का संदेश दिया है।

वांग यी के बयान के 4 ‘पावर पॉइंट्स’

चीनी विदेश मंत्री ने द्विपक्षीय संबंधों को पटरी पर लाने के लिए एक रोडमैप पेश किया है:

  1. प्रतिद्वंद्वी नहीं, साझेदार: चीन ने पहली बार स्पष्ट रूप से कहा कि भारत उसके लिए खतरा नहीं बल्कि एक ‘अवसर’ है। दोनों देशों को एक-दूसरे को दुश्मन के बजाय पार्टनर की नजर से देखना चाहिए।
  2. सीमा पर शांति का ‘धर्म’: एलएसी (LAC) पर जारी तनाव के बीच वांग यी ने ‘अच्छे पड़ोसी’ के धर्म को निभाने की बात कही, जो सीमा पर शांति बहाली का संकेत है।
  3. ब्रिक्स (BRICS) की जुगलबंदी: अगले दो वर्षों में ब्रिक्स की अध्यक्षता बारी-बारी से भारत और चीन के पास होगी। चीन चाहता है कि दोनों देश वैश्विक मंच पर एक-दूसरे का समर्थन करें।
  4. बाधाओं का अंत: अंतरराष्ट्रीय जिम्मेदारियों को निभाने के लिए दोनों देशों को पुरानी कड़वाहट और बाधाओं को पीछे छोड़कर आगे कदम बढ़ाना होगा।

क्यों बदला चीन का रुख? (Inside Analysis)

विशेषज्ञों का मानना है कि चीन का यह ‘हृदय परिवर्तन’ अचानक नहीं है। इसके पीछे कुछ बड़े कारण हो सकते हैं:

  • ग्लोबल साउथ का नेतृत्व: चीन जानता है कि भारत के बिना ‘ग्लोबल साउथ’ (विकासशील देशों) की आवाज अधूरी है।
  • आर्थिक हित: पश्चिमी देशों के साथ बढ़ते तनाव के बीच चीन के लिए भारत जैसा बड़ा बाजार और पड़ोसी सहयोगी बेहद जरूरी है।
  • एशिया का पुनरुत्थान: वांग यी ने साफ कहा कि अगर एशिया को दुनिया का नेतृत्व करना है, तो भारत-चीन का टकराव खत्म होना अनिवार्य है।

बड़ी बात: वांग यी ने प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मुलाकात का हवाला देकर यह संकेत दिया कि दोनों देशों के बीच अब ‘बर्फ पिघल चुकी है’ और रिश्ते सामान्य हो रहे हैं।


निष्कर्ष: क्या यह ‘हिंदी-चीनी भाई-भाई 2.0’ है?

चीन की ओर से बढ़ाए गए इस हाथ का भारत स्वागत तो करेगा, लेकिन ‘सतर्कता’ के साथ। भारत का स्टैंड हमेशा स्पष्ट रहा है—जब तक सीमा पर पूर्ण शांति नहीं होगी, रिश्ते पूरी तरह सामान्य नहीं हो सकते।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *