वन वाटिका की झील संकट में, मछलियों की मौत से बढ़ी चिंता
रामानुजगंज: वन वाटिका के पास झील में बड़ी संख्या में मरी मछलियां, प्रदूषण और ऑक्सीजन की कमी की आशंका
रामानुजगंज नगर पालिका क्षेत्र अंतर्गत वन वाटिका के समीप स्थित झील में बीते एक-दो दिनों से बड़ी संख्या में मरी हुई मछलियां दिखाई देने से स्थानीय लोगों में चिंता का माहौल है। झील के एक किनारे विशेष रूप से मछलियों के शव पानी की सतह पर तैरते और किनारे पर फंसे हुए देखे गए।
स्थल पर मौजूद पानी का रंग हरा-भूरा और गाढ़ा दिखाई दे रहा है। झील की सतह पर शैवाल (एल्गी) की परत के साथ-साथ प्लास्टिक बोतलें, पॉलीथिन और अन्य कचरा भी जमा पाया गया। इससे आशंका जताई जा रही है कि झील में गंदे पानी या जैविक कचरे के प्रवेश के कारण पानी में घुली ऑक्सीजन की मात्रा अचानक कम हो गई, जिससे मछलियों की मौत हुई।
स्थानीय जानकारों के अनुसार, इस प्रकार एक साथ अलग-अलग प्रजातियों की मछलियों का मरना आमतौर पर किसी बीमारी के बजाय ऑक्सीजन की तीव्र कमी या प्रदूषण का संकेत होता है। शैवाल की अधिकता दिन में ऑक्सीजन उत्पन्न करती है, लेकिन रात के समय वही शैवाल और सड़ा हुआ जैविक पदार्थ ऑक्सीजन की खपत कर लेते हैं, जिससे जलजीवों का दम घुट जाता है।
प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि झील के जिस हिस्से में मछलियां अधिक मरी हैं, उसी दिशा में कचरा और बहाव भी अधिक दिखाई देता है, जिससे किसी नाले या अपशिष्ट जल के झील में प्रवेश की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
स्थानीय नागरिकों ने नगर पालिका और संबंधित विभागों से मांग की है कि झील में मरी मछलियों को तत्काल हटाया जाए, गंदे पानी के प्रवेश के स्रोत की जांच की जाए और जल गुणवत्ता की जांच कराई जाए। समय पर कार्रवाई न होने की स्थिति में झील से दुर्गंध फैलने, मच्छरों के प्रकोप और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं की आशंका भी जताई जा रही है।
फिलहाल प्रशासन की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है, लेकिन मामले की गंभीरता को देखते हुए पर्यावरण और जनस्वास्थ्य की दृष्टि से शीघ्र हस्तक्षेप आवश्यक माना जा रहा है।
