हल्दिया नौसैनिक बेस: बंगाल की खाड़ी में भारत का नया ‘शक्ति केंद्र’हल्दिया, पश्चिम बंगाल
भारत ने पश्चिम बंगाल के हल्दिया में एक नया नौसैनिक बेस (Naval Detachment) स्थापित करने का निर्णय लिया है। यह रणनीतिक कदम न केवल भारत की समुद्री सीमाओं को सुरक्षित करेगा, बल्कि बंगाल की खाड़ी में चीन की बढ़ती दखलंदाजी और बांग्लादेश के बदलते राजनीतिक समीकरणों पर नजर रखने के लिए एक ‘वॉचटावर’ की तरह काम करेगा।रणनीतिक महत्व और मारक क्षमताइस बेस की स्थापना से भारतीय नौसेना की उत्तरी बंगाल की खाड़ी में पकड़ मजबूत होगी। यहाँ निम्नलिखित घातक युद्धपोतों की तैनाती की योजना है:फास्ट इंटरसेप्टर क्राफ्ट (FICs): ये उथले पानी में बेहद तेज गति (40-45 समुद्री मील) से चलने में सक्षम हैं।वॉटर जेट फास्ट अटैक वेसल्स (NWJFACs): ये 300 टन के वेसल्स त्वरित हमले और घुसपैठ रोकने के लिए प्रभावी माने जाते हैं।नागास्त्र ड्रोन (Loitering Munition): आधुनिक निगरानी और सटीक हमले के लिए इस बेस को ड्रोन तकनीक से भी लैस किया जा सकता है।चीन और बांग्लादेश पर नजरचीन की घेराबंदी: चीन लगातार हिंद महासागर और बंगाल की खाड़ी में अपना प्रभाव बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। हल्दिया बेस के जरिए भारत चीन की नौसेना (PLAN) की हर हरकत पर चौबीसों घंटे निगरानी रख सकेगा।बांग्लादेश की स्थिति: हल्दिया बांग्लादेश सीमा से मात्र 100 किमी दूर है। बांग्लादेश में 12 फरवरी 2026 को होने वाले आम चुनावों और अगस्त 2024 के तख्तापलट के बाद वहां की बदलती राजनीति ने भारत की सुरक्षा चिंताओं को बढ़ा दिया है।समुद्री सुरक्षा: यह बेस समुद्री घुसपैठ, तस्करी और अवैध गतिविधियों को रोकने के लिए ‘फर्स्ट रिस्पॉन्स’ सेंटर के रूप में कार्य करेगा।तुलनात्मक विश्लेषण: शक्ति संतुलनविशेषताहल्दिया नौसैनिक बेस (प्रस्तावित)प्रभावदूरीबांग्लादेश सीमा से ~100 किमीत्वरित निगरानी और प्रतिक्रिया।तकनीकहाई-स्पीड इंटरसेप्टर और ड्रोन्सउथले समुद्री इलाकों (Shallow Waters) में श्रेष्ठता।उद्देश्यएंटी-इंफिल्ट्रेशन और चीन पर निगरानीक्षेत्रीय शक्ति संतुलन (Power Balance) भारत के पक्ष में।

