बस्तर में नक्सलवाद की कमर टूटी: 108 माओवादियों ने किया सरेंडर, ₹3.60 करोड़ कैश और 1 किलो सोना बरामद
जगदलपुर/बस्तर: छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग में नक्सलवाद के खिलाफ चल रहे अभियान ‘पूना मारगेम’ (पुनर्वास से पुनर्जीवन) को आज एक बड़ी और ऐतिहासिक सफलता मिली है। बस्तर संभाग मुख्यालय जगदलपुर में समाज के वरिष्ठ जनों और पुलिस प्रशासन की मौजूदगी में 108 माओवादियों ने हिंसा का रास्ता छोड़ मुख्यधारा में लौटने का निर्णय लिया।

इन आत्मसमर्पित नक्सलियों पर कुल 3 करोड़ 95 लाख रुपये का इनाम घोषित था। छत्तीसगढ़ के डिप्टी सीएम और गृह मंत्री विजय शर्मा ने इस उपलब्धि को नक्सल मुक्त बस्तर की दिशा में एक निर्णायक कदम बताया है।
प्रमुख उपलब्धियां और बरामदगी:
- ऐतिहासिक कैश और सोना: बीजापुर में इंद्रावती नदी के पास नक्सलियों द्वारा जमीन में दबाया गया एक बड़ा ‘डंप’ बरामद किया गया है। इसमें 3 करोड़ 60 लाख रुपये नकद और 1 किलो सोना बरामद हुआ है, जो अब तक की सबसे बड़ी बरामदगी मानी जा रही है।
- हथियारों का जखीरा: सरेंडर के साथ ही नक्सलियों ने 101 अत्याधुनिक हथियार सौंपे हैं, जिनमें 6 एके-47, 11 इंसास राइफल, 5 एसएलआर और कार्बाइन जैसे घातक हथियार शामिल हैं।
- बड़े कैडर का समर्पण: सरेंडर करने वालों में दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी (DKSZC) के 6 डिवीजनल कमेटी मेंबर (DVCM), 3 कंपनी प्लाटून मेंबर और 18 पीपीसीएम रैंक के नक्सली शामिल हैं।
31 मार्च 2026 तक नक्सल मुक्त होगा छत्तीसगढ़
गृह मंत्री विजय शर्मा ने प्रेस वार्ता में बताया कि बस्तर संभाग की कुल 30 एरिया कमेटियों में से 26 कमेटियां अब पूरी तरह खत्म हो चुकी हैं। शेष 4 कमेटियों पर सुरक्षाबलों का काम जारी है। उन्होंने दोहराया कि देश के गृह मंत्री अमित शाह द्वारा तय की गई डेडलाइन 31 मार्च 2026 तक छत्तीसगढ़ को पूरी तरह नक्सलवाद से मुक्त कर लिया जाएगा।
‘पूना मारगेम’ से बदल रही तस्वीर
बस्तर आईजी सुंदरराज पी ने कहा कि आत्मसमर्पण करने वाले माओवादी बीजापुर, नारायणपुर, बस्तर, कांकेर, सुकमा और दंतेवाड़ा जिले के निवासी हैं। पुलिस की रणनीतिक घेराबंदी और पुनर्वास नीति के कारण नक्सली अब भारी संख्या में संगठन छोड़ रहे हैं।
मुख्य आकर्षण:
- इनामी राशि: ₹3.95 करोड़ (कुल 108 नक्सलियों पर)।
- बरामदगी: ₹3.60 करोड़ कैश + 1 किलो सोना।
- हथियार: 101 (AK-47 सहित)।
- लक्ष्य: 31 मार्च 2026 (नक्सल मुक्त प्रदेश)।
