ग्राउंड रिपोर्ट: राष्ट्रपति के ‘दत्तक पुत्रों’ की प्यास बुझाने में फेल हुआ जल जीवन मिशन; दूषित पानी पीने को मजबूर 150 पंडो परिवार
मनेन्द्रगढ़ (छत्तीसगढ़) एक तरफ देश 2026 में आधुनिक भारत और डिजिटल क्रांति का जश्न मना रहा है, वहीं छत्तीसगढ़ के मनेन्द्रगढ़ जिले से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है जो प्रशासनिक दावों की पोल खोलती है। जिला मुख्यालय से महज 40 किलोमीटर दूर जनपद पंचायत मनेन्द्रगढ़ की ग्राम पंचायत बाला में आज भी ‘आदिम युग’ जैसी स्थितियां बनी हुई हैं।

- ढोढ़ी का दूषित पानी: मौत को दावत देती प्यास
ग्राम पंचायत बाला के लगभग 150 पंडो परिवार (जिन्हें विशेष पिछड़ी जनजाति का दर्जा प्राप्त है) आज भी पीने के पानी के लिए ‘ढोढ़ी’ (जमीन के छोटे प्राकृतिक गड्ढे) पर निर्भर हैं। ग्रामीण इसी दूषित पानी को पीने, खाना बनाने और निस्तारी के लिए मजबूर हैं। महिलाओं और बच्चों को सिर पर बर्तन रखकर पथरीले रास्तों से दूर स्थित इन जल स्रोतों तक जाना पड़ता है। ग्रामीणों का कहना है कि यह पानी पीकर वे अक्सर जल-जनित बीमारियों (हैजा, पेचिश) का शिकार होते हैं। - जल जीवन मिशन: पाइपलाइन बिछी, पर नल सूखे
केंद्र सरकार की सबसे महत्वाकांक्षी योजना ‘जल जीवन मिशन’ का लक्ष्य हर घर तक शुद्ध पेयजल पहुँचाना है, लेकिन बाला ग्राम में यह योजना ‘सफेद हाथी’ साबित हो रही है। ग्रामीणों में भारी रोष है कि सालों बीत जाने के बाद भी उनके घरों में नल का कनेक्शन नहीं पहुँचा है।
“हमें सालों से सिर्फ आश्वासन मिला है। चुनाव के समय नेता आते हैं, वादे करते हैं और फिर गायब हो जाते हैं। प्रशासन के दावों और हमारी जमीनी हकीकत में जमीन-आसमान का फर्क है।”
— स्थानीय ग्रामीण
- सड़क नहीं तो विकास कैसा?
समस्या सिर्फ पानी तक सीमित नहीं है। गांव तक पहुँचने के लिए पक्की सड़क का अभाव है। बारिश के मौसम में यह गांव जिला मुख्यालय से पूरी तरह कट जाता है। कीचड़ और ऊबड़-खाबड़ रास्तों के कारण न तो एम्बुलेंस समय पर पहुँच पाती है और न ही बच्चे स्कूल जा पाते हैं। विकास के नाम पर यहां सिर्फ चुनावी वादे ही नजर आते हैं। - प्रशासन की चुप्पी पर सवाल
‘राष्ट्रपति के दत्तक पुत्र’ कहे जाने वाले पंडो जनजाति के लोगों के प्रति प्रशासन की यह उदासीनता गंभीर सवाल खड़े करती है। ग्रामीणों ने अब चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही पेयजल और सड़क की समस्या का समाधान नहीं हुआ, तो वे उग्र आंदोलन और आगामी चुनावों के बहिष्कार के लिए मजबूर होंगे।
मुख्य बिंदु एक नज़र में:
प्रभावित: 150 पंडो परिवार।
प्रमुख मांग: घर-घर नल कनेक्शन और पक्की सड़क का निर्माण।
खतरा: दूषित पानी से गंभीर महामारियों की आशंका।
