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जामवंतपुर में प्रशासन का डंडा: मुक्तिधाम निर्माण में अड़ंगा डालने वालों को एसडीएम की दो-टूक, फिर से शुरू हुआ काम

बलरामपुर | जामवंतपुर गांव में पिछले कुछ दिनों से पसरा सन्नाटा आज प्रशासन की हलचल के साथ टूट गया। जिस मुक्तिधाम के निर्माण को लेकर विवाद की स्थिति बनी हुई थी और गांव के लोगों में भारी आक्रोश था, आज वहां आखिरकार न्याय और सरकारी आदेश का बुलडोजर (और मिस्त्री) चलते दिखे।

क्या था जमीनी विवाद?

दरअसल, गांव में मुक्तिधाम के लिए आवंटित शासकीय भूमि पर एक स्थानीय निवासी, रामकुमार कुशवाहा ने अपना दावा ठोकते हुए काम रुकवा दिया था। बाउंड्री वॉल का काम आधा-अधूरा पड़ा था और ग्रामीणों के बीच यह चर्चा का विषय बना हुआ था कि क्या एक व्यक्ति के विरोध के कारण पूरे गांव का सार्वजनिक कार्य रुक जाएगा?

मौके पर पहुंचे एसडीएम: सीधा एक्शन

आज शनिवार को जब स्थिति बिगड़ने की आशंका बढ़ी, तो खुद एसडीएम आनंद नेताम राजस्व विभाग और पुलिस बल के भारी अमले के साथ मौके पर उतरे। उन्होंने केवल फाइलों में ही नहीं, बल्कि जमीन पर खुद पैमाइश और निरीक्षण कर यह साफ कर दिया कि:

“यह भूमि पूरी तरह शासकीय है। किसी भी व्यक्ति का इस पर निजी दावा निराधार है।”

चेतावनी और काम की शुरुआत

एसडीएम ने कड़े तेवर दिखाते हुए स्पष्ट किया कि सरकारी काम में बाधा डालना अपराध है। आपत्ति करने वाले पक्ष को मौके पर ही समझाइश दी गई और चेतावनी दी गई कि यदि दोबारा हस्तक्षेप हुआ, तो कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

मौके की स्थिति:

  • बाउंड्री वॉल: प्रशासन की मौजूदगी में ईंटें फिर से जुड़ने लगी हैं।
  • ग्रामीणों का पक्ष: गांव के बुजुर्गों और युवाओं ने राहत की सांस ली है। उनका कहना है कि लंबे समय से इस मुक्तिधाम की जरूरत थी, जो अब पूरी होती दिख रही है।
  • सुरक्षा: एहतियातन पुलिस बल को निर्माण पूरा होने तक निगरानी रखने को कहा गया है।

निष्कर्ष

जामवंतपुर की यह घटना बताती है कि यदि प्रशासन सक्रिय हो, तो निजी स्वार्थ सार्वजनिक विकास के आड़े नहीं आ सकते। फिलहाल, मौके पर काम पूरी रफ्तार से जारी है और गांव में स्थिति पूरी तरह सामान्य है।

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