पीलिया का जानलेवा प्रहार, 13 वर्षीय छात्र की मौत; नगर निगम के पानी पर उठे गंभीर सवाल
अम्बिकापुर | 25 फरवरी, 2026
शहर में पीलिया (जॉन्डिस) का प्रकोप अब जानलेवा साबित होने लगा है। नमनाकला खटीक पारा क्षेत्र में एक 13 वर्षीय बालक की पीलिया से हुई दुखद मौत के बाद पूरे शहर में हड़कंप मच गया है। इस घटना ने प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग और नगर निगम की नींद उड़ा दी है, क्योंकि शहर के विभिन्न वार्डों में अब तक 50 से अधिक लोग इस बीमारी की चपेट में आ चुके हैं।
उपचार के दौरान मासूम ने तोड़ा दम

जानकारी के अनुसार, नमनाकला निवासी राजेश राय और शिक्षिका प्रेमा राय के 13 वर्षीय पुत्र दिव्यांश राय को 19 फरवरी को अचानक तेज बुखार आया। दिव्यांश कार्मेल स्कूल में कक्षा आठवीं का छात्र था। परिजनों ने पहले उसे निजी अस्पताल और फिर मिशन अस्पताल ले जाया, लेकिन हालत बिगड़ती गई। सोमवार को स्थिति अत्यंत गंभीर होने और प्लेटलेट्स गिरने के कारण उसे जीवन ज्योति अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहाँ उपचार के दौरान उसने दम तोड़ दिया।
असमय हुई इस मृत्यु से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। बालक का अंतिम संस्कार उसके पैतृक गांव (गाजीपुर, उत्तर प्रदेश) में किया जाएगा।
नगर निगम के पेयजल पर सवाल
परिजनों का कहना है कि वे घर में नगर निगम द्वारा सप्लाई किए जाने वाले पानी का ही उपयोग पीने के लिए करते थे। इस बयान के बाद शहर के पेयजल की गुणवत्ता को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। स्थानीय निवासियों में रोष है कि दूषित पानी की वजह से महामारी जैसी स्थिति बन रही है।
इन क्षेत्रों में फैला संक्रमण, स्वास्थ्य विभाग अलर्ट
पीलिया का संक्रमण केवल नमनाकला तक सीमित नहीं है:
- नवागढ़ और घुटरापारा: इन क्षेत्रों में भी बड़ी संख्या में मरीज मिलने से हड़कंप मचा हुआ है।
- स्वास्थ्य शिविर: प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य विभाग द्वारा विशेष शिविर लगाकर सैम्पल लिए जा रहे हैं।
- मरीजों की संख्या: अब तक 50 से अधिक लोग पीलिया प्रभावित पाए गए हैं, जिनका इलाज जारी है।
प्रशासन की बढ़ी चिंता
घटना के बाद नगर निगम और स्वास्थ्य विभाग की टीम ने प्रभावित क्षेत्रों में पानी के पाइपलाइनों की जांच और साफ-सफाई के निर्देश दिए हैं। डॉक्टरों ने सलाह दी है कि लोग पानी उबालकर पिएं और बाहर के खुले खाद्य पदार्थों से बचें।
“यह एक बेहद दुखद घटना है। हम पेयजल स्रोतों की जांच करवा रहे हैं और प्रभावित क्षेत्रों में दवाओं का वितरण सुनिश्चित किया जा रहा है।” — (स्थानीय प्रशासन का संभावित रुख)
