रायपुर के डॉक्टरों का वर्ल्ड रिकॉर्ड: 11 साल के मासूम के दिल से निकाला ‘कैंसर का जाल’, चिकित्सा जगत में रचा इतिहास
मेकाहारा के सर्जन्स ने 4 घंटे की जटिल सर्जरी में मात दी दुर्लभ ‘स्टेज-3 इनवेसिव थायमोमा’ को; दुनिया का सबसे कम उम्र का सफल केस बना रायपुर का यह ऑपरेशन।
रायपुर | विशेष संवाददाता छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के डॉ. भीमराव अंबेडकर स्मृति चिकित्सालय (मेकाहारा) ने चिकित्सा विज्ञान के क्षेत्र में एक ऐसा कीर्तिमान स्थापित किया है, जिसकी गूँज अब अंतरराष्ट्रीय मेडिकल जर्नल्स में सुनाई देगी। अस्पताल के हार्ट, चेस्ट एवं वैस्कुलर सर्जरी विभाग ने एक 11 साल के बच्चे के दिल और फेफड़ों के बीच फंसे 400 ग्राम वजनी दुर्लभ कैंसर ट्यूमर को सफलतापूर्वक निकालकर उसे नई जिंदगी दी है।
क्यों है यह ‘वर्ल्ड रिकॉर्ड’?

विभागाध्यक्ष डॉ. कृष्णकांत साहू के अनुसार, अब तक वैश्विक मेडिकल रिकॉर्ड्स में इस घातक बीमारी (टाइप-बी थायमोमा) का सबसे कम उम्र का मरीज 12 साल का दर्ज था। रायपुर के इस सफल ऑपरेशन ने न केवल उस रिकॉर्ड को तोड़ा है, बल्कि भारत के सरकारी अस्पतालों की दक्षता को विश्व स्तर पर प्रमाणित किया है।
4 घंटे का ‘महा-ऑपरेशन’ और जटिल तकनीक
चांपा निवासी कक्षा 6वीं के इस छात्र के सीने में 12×8 सेंटीमीटर का ट्यूमर इस कदर फैल चुका था कि उसने दिल की मुख्य धमनियों और फेफड़ों को जकड़ लिया था। डॉक्टरों के लिए चुनौती ‘करो या मरो’ जैसी थी।
- ड्यूल एप्रोच तकनीक: डॉक्टरों ने स्टर्नोटॉमी और थोरेक्टोमी (Dual Approach) का एक साथ उपयोग किया।
- हार्ट-लंग मशीन: सर्जरी के दौरान मरीज को जीवन रक्षक मशीन पर रखा गया ताकि दिल और फेफड़ों को सुरक्षित रखते हुए ट्यूमर निकाला जा सके।
- सैटेलाइट ट्यूमर का सफाया: मुख्य ट्यूमर के साथ-साथ तीन अन्य छोटे सैटेलाइट ट्यूमर भी हटाए गए, ताकि भविष्य में कैंसर की वापसी का खतरा न रहे।
मौत को हराकर फिर स्कूल पहुँचा नन्हा योद्धा
करीब 6 महीने पहले जब बच्चा अस्पताल पहुँचा था, तो उसे सांस लेना भी दूभर था। कई बड़े निजी अस्पतालों ने इस केस को ‘असंभव’ बताकर हाथ खड़े कर दिए थे। लेकिन मेकाहारा में सफल सर्जरी और 25 साइकिल रेडिएशन थेरेपी के बाद, यह बच्चा आज पूरी तरह स्वस्थ है। राहत की बात यह है कि वह अपनी कक्षा 6वीं की परीक्षा भी दे चुका है और एक सामान्य जीवन जी रहा है।
“यह छत्तीसगढ़ के लिए गौरव का क्षण है। हमारी टीम ने जो कर दिखाया है, वह साबित करता है कि सरकारी संस्थानों में भी विश्व स्तरीय विशेषज्ञता उपलब्ध है।” — डॉ. विवेक चौधरी, डीन, पं. नेहरू चिकित्सा महाविद्यालय
सम्मान की चमक: इस दुर्लभ केस को राष्ट्रीय कैंसर सर्जरी सम्मेलन में ‘बेस्ट पेपर अवॉर्ड’ से नवाजा गया है। प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने पूरी मेडिकल टीम को इस ऐतिहासिक सफलता पर बधाई दी है।
