रामानुजगंज नगर पालिका: बैठकों के ‘सूखे’ पर सियासी बवाल, नेता प्रतिपक्ष ने खोला मोर्चा
बलरामपुर-रामानुजगंज | नगर पालिका परिषद रामानुजगंज में विकास कार्यों की रफ्तार पर ‘अघोषित ब्रेक’ और नियमित बैठकों के अभाव ने अब एक बड़े विवाद का रूप ले लिया है। नेता प्रतिपक्ष प्रतीक सिंह ने नगर प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए सीधे कलेक्टर से दखल देने की मांग की है।
प्रमुख आरोप: कागजों में नियम, हकीकत में सन्नाटा

प्रतीक सिंह का आरोप है कि नगर पालिका परिषद के गठन को एक साल से अधिक का समय बीत चुका है, लेकिन इस दौरान परिषद की बैठक सिर्फ दो बार ही हुई है।
”छत्तीसगढ़ नगर पालिका अधिनियम, 1961 के तहत बैठकों का नियमित आयोजन अनिवार्य है, लेकिन यहाँ नियमों को ताक पर रख दिया गया है।” — प्रतीक सिंह, नेता प्रतिपक्ष
विकास कार्यों पर पड़ा असर

बैठकों के न होने से नगर के विकास पर पड़ रहे प्रभावों को इस प्रकार समझा जा सकता है:
- निविदाओं में देरी: वर्ष 2025-26 और 2026-27 की वार्षिक निविदाएं (Tenders) अब तक जारी नहीं हो पाई हैं।
- फंड का रुकावट: बैठकों के अभाव में पार्षद निधि का उपयोग नहीं हो पा रहा है, जिससे वार्डों के बुनियादी काम ठप पड़े हैं।
- सीमित फैसले: आरोप है कि अध्यक्ष और सीएमओ केवल PIC (प्रेसिडेंट-इन-काउंसिल) की बैठकों में चुनिंदा पार्षदों के साथ मिलकर अहम निर्णय ले रहे हैं, जो लोकतांत्रिक प्रक्रिया के खिलाफ है।
सीएमओ की अनुपस्थिति पर भी उठाए सवाल

नेता प्रतिपक्ष ने मुख्य नगर पालिका अधिकारी (CMO) की कार्यशैली पर भी प्रहार किया है। उन्होंने शिकायत की है कि सीएमओ अक्सर कार्यालय से नदारद रहते हैं, जिससे न केवल जनप्रतिनिधि बल्कि अपनी समस्याएं लेकर आने वाले आम नागरिक भी परेशान हो रहे हैं।
कलेक्टर से हस्तक्षेप की मांग
प्रतीक सिंह ने जिला कलेक्टर को पत्र सौंपकर मांग की है कि:
- सीएमओ को हर दो माह में अनिवार्य बैठक आयोजित करने के निर्देश दिए जाएं।
- वार्डों की जनसमस्याओं को एजेंडे में शामिल कर पारदर्शी शासन सुनिश्चित किया जाए।
- नगर प्रशासन में जवाबदेही तय की जाए ताकि जनहित के कार्य बाधित न हों।
निष्कर्ष: रामानुजगंज की इस ‘प्रशासनिक सुस्ती’ ने पार्षदों और जनता के बीच भारी असंतोष पैदा कर दिया है। अब देखना यह होगा कि कलेक्टर के हस्तक्षेप के बाद नगर पालिका की बैठकों में कितनी नियमितता आती है।
