बलरामपुर–रामानुजगंज मुख्यालय विवाद पर सियासी हलचल तेज
पीएमओ से राज्य शासन और कलेक्टर तक पहुंचा मामला, मंत्री बोले – “देखते हैं क्या हो सकता है”

बलरामपुर। नवगठित बलरामपुर–रामानुजगंज जिले में जिला मुख्यालय को लेकर वर्षों से चल रहा असंतोष एक बार फिर तेज हो गया है। प्रशासनिक कार्यालयों, शैक्षणिक संस्थानों और न्यायालय की स्थापना को लेकर दोनों नगरों के बीच खींचतान अब प्रधानमंत्री कार्यालय तक पहुंच चुकी है। पीएमओ से राज्य शासन को प्रेषित पत्र और फिर राजस्व विभाग की ओर से कलेक्टर को दिए गए निर्देश के बाद जिले में राजनीतिक और प्रशासनिक हलचल बढ़ गई है।
विवाद की पृष्ठभूमि
वर्ष 2012 में जब बलरामपुर–रामानुजगंज जिले का गठन हुआ, तब बलरामपुर को जिला मुख्यालय निर्धारित किया गया। उस समय छह विकासखंडों – बलरामपुर, रामचंद्रपुर, वाड्रफनगर, राजपुर, शंकरगढ़ और कुसमी – की भौगोलिक स्थिति और जनसुविधा को आधार माना गया था।
बलरामपुर पक्ष का तर्क है कि मुख्यालय घोषित होने के बावजूद कई महत्वपूर्ण जिला स्तरीय कार्यालय, कॉलेज और अन्य संस्थान लगभग 30 किलोमीटर दूर झारखंड सीमा से सटे रामानुजगंज में संचालित हो रहे हैं, जिससे आम नागरिकों और कर्मचारियों को अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ती है।
वहीं रामानुजगंज पक्ष का कहना है कि यहां कई कार्यालय वर्षों से स्थापित हैं। जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) कार्यालय 1976 से यहीं संचालित है। साथ ही जिला न्यायालय भी 2018 से रामानुजगंज में कार्यरत है, जो उच्च न्यायालय के निर्णय के आधार पर स्थापित हुआ।
पीएमओ तक कैसे पहुंचा मामला
जनपद पंचायत सदस्य समीर सिंह देव सहित अन्य प्रतिनिधियों ने 27–28 अगस्त 2025 को प्रधानमंत्री को ज्ञापन भेजा। इसमें आरोप लगाया गया कि जिला मुख्यालय की मूल अवधारणा के विपरीत “षडयंत्रपूर्ण तरीके” से सुविधाओं का विस्तार रामानुजगंज में किया जा रहा है। ज्ञापन में मांग की गई कि सभी प्रमुख प्रशासनिक और शैक्षणिक संस्थान बलरामपुर में केंद्रित किए जाएं।
15 सितंबर 2025 को अपर कलेक्टर ने यह पत्र प्रधानमंत्री कार्यालय को अग्रेषित किया।
21 नवंबर 2025 को पीएमओ के अंडर सेक्रेटरी संजय कुमार मिश्रा ने इसे छत्तीसगढ़ के मुख्य सचिव को “उपयुक्त कार्रवाई” के लिए भेजा।
इसके बाद 19 जनवरी 2026 को राज्य के राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग की अवर सचिव लीना राकेश ने कलेक्टर, बलरामपुर को नियमानुसार कार्यवाही कर आवेदक और शासन को अवगत कराने के निर्देश दिए। पत्र की प्रति पीएमओ को भी सूचनार्थ भेजी गई।
प्रमुख संस्थानों की वर्तमान स्थिति
जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) कार्यालय:
रामानुजगंज में यथावत। अक्टूबर 2025 में शिफ्टिंग की अफवाहों को खारिज किया गया था।
जिला एवं सत्र न्यायालय:
2018 से रामानुजगंज में कार्यरत। पूर्व में बलरामपुर में संचालन बंद किया गया था।
अन्य कार्यालय व संस्थान:
कुछ कार्यालय और शैक्षणिक संस्थान रामानुजगंज में संचालित। केंद्रीय विद्यालय स्थापना की प्रक्रिया भी चर्चा में रही है।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएं
रामानुजगंज विधायक एवं राज्य के कैबिनेट मंत्री रामविचार नेताम ने कहा, “देखते हैं क्या हो सकता है।”
सरगुजा लोकसभा क्षेत्र के सांसद चिंतामणि महराज ने दोनों पक्षों को साथ बैठाकर सहमति से निर्णय लेने की बात कही है।
राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि यह मुद्दा स्थानीय असंतोष से आगे बढ़कर सियासी रूप ले चुका है, और आने वाले समय में यह क्षेत्रीय राजनीति का प्रमुख विषय बन सकता है।
आगे क्या
फिलहाल मामला कलेक्टर स्तर पर विचाराधीन है। पीएमओ के संज्ञान में आने के बाद यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि राज्य शासन किस तरह संतुलन साधता है।
जिले की जनता की नजर अब इस बात पर है कि क्या प्रशासनिक पुनर्संरचना होगी या यथास्थिति कायम रहेगी। स्पष्ट है कि मुख्यालय का सवाल अब सिर्फ भौगोलिक नहीं रहा, बल्कि राजनीतिक और जनभावना से भी जुड़ गया है।
