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ज्ञानोत्सव के प्रथम दिन वैदिक यज्ञ से गूंजा परिसर, ‘ग्रामसभा सशक्तिकरण’ पर हुआ बौद्धिक मंथन

रामानुजगंज लिटिल फ्लावर स्कूल एवं आमंत्रण धर्मशाला प्रांगण में आयोजित ‘ज्ञानोत्सव’ के प्रथम दिन आज आध्यात्मिकता और वैचारिक विमर्श का अद्भुत संगम देखने को मिला। कार्यक्रम की शुरुआत जहाँ वैदिक मंत्रोच्चार और यज्ञ के साथ हुई, वहीं दूसरे सत्र में ग्रामीण भारत की रीढ़ ‘ग्रामसभा’ की भूमिका पर गंभीर चर्चा की गई।


वैदिक अनुष्ठानों के साथ आध्यात्मिक शुरुआत
प्रातः 8:00 बजे गायत्री यज्ञशाला में वैदिक यज्ञ के साथ अनुष्ठानों का शुभारंभ हुआ। सुप्रसिद्ध वैदिक विद्वान सुधांशु जी महाराज के ओजस्वी पौरोहित्य में मुख्य यजमानों—मनीष अग्रवाल, द्वारिका पांडे, अनुप गुप्ता तथा अजय गुप्ता (मनोकामना वस्त्रालय)—ने आहुतियां प्रदान कीं।
कार्यक्रम का विधिवत उद्घाटन रमन अग्रवाल एवं उनकी पत्नी श्रीमती शिप्रा अग्रवाल कन्हैया लाल अग्रवाल, प्रेमा अग्रवाल, मोहन गुप्ता एवं अजय गुप्ता ने दीप प्रज्वलित कर किया। मंच का सफल संचालन दिवाकर मुखर्जी ने किया।
वर्षगांठ का उल्लास
कार्यक्रम के दौरान रमन अग्रवाल एवं उनकी पत्नी श्रीमती शिप्रा अग्रवाल की वैवाहिक वर्षगांठ पर उपस्थित अतिथियों और गणमान्य नागरिकों ने इस दंपत्ति को मंगलमय जीवन की शुभकामनाएं दी

संगोष्ठी: “ग्रामसभा सशक्तिकरण अभियान”
दिन के दूसरे सत्र में लिटिल फ्लावर स्कूल प्रांगण में एक वैचारिक संगोष्ठी आयोजित हुई। इस संगोष्ठी में वक्ताओं ने वर्तमान प्रशासनिक व्यवस्था और ग्रामसभा के अधिकारों पर अपनी राय रखी।
• अधिकारों का केंद्रीकरण: राम बहादुर यादव ने कहा कि ग्रामसभा के अधिकार वर्तमान में तंत्र के पास हैं, जिन्हें वापस लाना होगा। वहीं, ज्ञानेंद्र आर्य और राजदेव जी ने जोर दिया कि सरकारी चोरी रोकने के लिए ग्रामसभा को सशक्त करना ही एकमात्र विकल्प है।
• प्रचार-प्रसार की कमी: कबीरा बाबा ने खेद व्यक्त करते हुए कहा कि विचार तो उत्तम हैं, परंतु इनका जनता के बीच प्रचार-प्रसार नहीं हो पा रहा है।
• संवैधानिक अधिकारों की मांग: बजरंग मुनि जी ने तीखे स्वर में कहा कि “स्वतंत्रता के 70 वर्षों बाद भी जनता लोकतंत्र के असली अर्थ से अनजान है। ग्रामसभा को केवल कार्यपालिक अधिकार मिले हैं, विधायी नहीं। जब तक संविधान में लिखित 29 अधिकार ग्रामसभा को नहीं मिलते, तब तक आम जनता का हित संभव नहीं है।”
• सरपंच की भूमिका: नरेश कुमार ठाकुर ने कहा कि वर्तमान में सारी शक्तियां व्यावहारिक रूप से सरपंच के पास सिमट गई हैं, जिससे ग्रामसभा निष्क्रिय हो रही है।
मुख्य उपस्थिति: कार्यक्रम में ज्ञानेंद्र आर्य, रामराज जी, राजदेव जी सहित बड़ी संख्या में प्रबुद्ध नागरिक और ग्रामीण क्षेत्र के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

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