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प्रोग्रेसिव अलायंस, कांग्रेस और विवाद: संक्षिप्त तथ्यात्मक सार

दिसंबर 2025 को सैम पित्रोदा ने आधिकारिक रूप से घोषणा की कि राहुल गांधी ग्लोबल प्रोग्रेसिव एलायंस के प्रेसीडियम (अध्यक्ष मंडल) सदस्य हैं। सैम पित्रोदा खुद सदस्य हैं। सैम पित्रोदा ने 110 लोकतांत्रिक देश का समूह कहा। इस पर भाजपा प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने कांग्रेस के जार्ज सोरोस कनेक्शन और भारत विरोधी होने का आरोप लगाया आई इस खबर की समीक्षा करते हैं।

 

ग्लोबल प्रोग्रेसिव अलायंस क्या है?

 

*Global Progressive Alliance* दुनिया भर की लगभग 120–140 सामाजिक-लोकतांत्रिक और प्रगतिशील राजनीतिक पार्टियों का अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क है। सैम पित्रोदा का बयान अतिश्योक्तिपूर्ण है, यह देशों का नहीं, बल्कि राजनीतिक दलों का मंच है, जिसमें लगभग 100 देशों की पार्टियां शामिल हैं।

 

कांग्रेस नेताओं की भूमिका

 

*Rahul Gandhi* इस संगठन की सर्वोच्च निर्णयकारी संस्था *Presidium* के सदस्य हैं।

*Sam Pitroda* इसमें कांग्रेस पार्टी के प्रतिनिधि के रूप में सदस्य हैं।

 

विवाद की पृष्ठभूमि

 

दिसंबर 2025 में सैम पित्रोदा के बयान के बाद यह मुद्दा सामने आया कि राहुल गांधी ने संसद सत्र के दौरान प्रोग्रेसिव अलायंस की बैठक में भाग लिया। इसके बाद *BJP* ने कांग्रेस पर विदेशी मंचों के साथ मिलकर भारत के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप का आरोप लगाया।

 

 

भाजपा के आरोप बनाम तथ्य

 

1. भारत-विरोधी मंच होने का आरोप

 

*स्थिति:* तथ्यात्मक रूप से सही।

प्रोग्रेसिव अलायंस से जुड़े यूरोपीय सोशल-डेमोक्रेटिक समूह ने CAA और अनुच्छेद 370 के खिलाफ प्रस्ताव पारित किए हैं।

*निष्कर्ष:* यह मंच भारत की संसद द्वारा पारित कानूनों का अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विरोध करता रहा है।

 

2. विदेशी हस्तक्षेप का संकेत

 

*स्थिति:* व्याख्या का विषय।

राहुल गांधी ने यहां भारतीय लोकतंत्र को “वैश्विक चिंता” बताया और पश्चिमी देशों की चुप्पी पर सवाल उठाया।

*निष्कर्ष:* सीधे हस्तक्षेप की मांग नहीं, लेकिन बाहरी दबाव की अपेक्षा का संकेत माना गया।

 

3. जॉर्ज सोरोस से कनेक्शन

 

*स्थिति:* अपुष्ट संभावित।

*George Soros* की *Open Society Foundations* और प्रोग्रेसिव अलायंस का वैचारिक एजेंडा मिलता-जुलता है, पर प्रत्यक्ष फंडिंग का कोई सार्वजनिक प्रमाण नहीं। साथ ही कई ऐसे दल प्रोगेसिव एलाइंस में शामिल है जिनको सोरोस की संस्था द्वारा फंडिंग होता है।

*निष्कर्ष:* सीधा संबंध सिद्ध नहीं, लेकिन समान वैचारिक इकोसिस्टम के आधार पर सहयोगियों को फंडिंग।

 

4. “110 देश सदस्य” का दावा

 

*स्थिति:* भ्रामक, झूठा।

यह देशों का नहीं, राजनीतिक पार्टियों का गठबंधन है।

*निष्कर्ष:* दावा तकनीकी रूप से गलत है।

 

 

जॉर्ज सोरोस और भारत

 

* सोरोस राष्ट्रवाद के आलोचक और कार्ल पोपर के फाल्सीफिकेशन सिद्धांत के “ओपन सोसाइटी” के समर्थक हैं।

* उन्होंने मोदी सरकार की सार्वजनिक आलोचना की है और अडानी-हिंडनबर्ग मामले पर टिप्पणी की है।

* भारत सरकार उन्हें विदेशी प्रभाव के माध्यम से राजनीतिक हस्तक्षेप करने वाला मानती है, जबकि समर्थक उन्हें मानवाधिकार समर्थक कहते हैं।

 

 

समग्र निष्कर्ष

 

यह तथ्यात्मक है कि जिस अंतरराष्ट्रीय मंच पर राहुल गांधी नेतृत्वकारी भूमिका में हैं, उसी मंच ने भारत की संप्रभुता से जुड़े मुद्दों पर भारत-विरोधी प्रस्तावों का समर्थन किया है।

हालांकि विदेशी फंडिंग या प्रत्यक्ष साजिश का कोई ठोस प्रमाण सार्वजनिक नहीं है, लेकिन वैचारिक और राजनीतिक टकराव वास्तविक और दस्तावेज़ी है।

 

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