रामानुजगंज: राहत की उम्मीद पर भारी पड़ी अव्यवस्था; तीन महीने के राशन के लिए तपती धूप में जूझ रहे ग्रामीण
रामानुजगंज। छत्तीसगढ़ शासन द्वारा अप्रैल में तीन महीने का राशन एकमुश्त देने का फैसला ग्रामीणों के लिए ‘खुशी’ से ज्यादा ‘ख्वारी’ का कारण बन गया है। संसाधनों की भारी कमी और लचर वितरण प्रणाली ने रामानुजगंज की व्यवस्था को पूरी तरह पटरी से उतार दिया है।
भीषण गर्मी और अंतहीन कतारें

5 अप्रैल से शुरू हुए इस वितरण अभियान ने प्रशासन के दावों की पोल खोल दी है। हजारों की आबादी पर केवल दो वितरण केंद्र (बुद्धुटोला और 12वीं बटालियन पेट्रोल पंप के पास) बनाए गए हैं। परिणाम यह है कि ग्रामीण सुबह से ही केंद्रों पर उमड़ रहे हैं, लेकिन सुविधाओं के नाम पर उन्हें सिर्फ कड़ी धूप और घंटों का इंतजार मिल रहा है।
तकनीकी पेच ने बढ़ाई मुसीबत
वितरण में हो रही देरी की सबसे बड़ी वजह ‘डिजिटल प्रमाणीकरण’ है।
- तीन महीने का राशन एक साथ देने के चक्कर में हर हितग्राही को बार-बार अंगूठा लगाना पड़ रहा है।
- सर्वर की समस्या और फिंगरप्रिंट मैच न होने पर OTP की लंबी प्रक्रिया अपनानी पड़ रही है।
- इस वजह से एक कार्डधारी का काम निपटाने में काफी समय लग रहा है, जिससे कतारें लंबी होती जा रही हैं।
खाली हाथ लौटने को मजबूर ग्रामीण
दूरदराज के गांवों से आए बुजुर्ग और महिलाएं सुबह बिना खाए-पिए इस उम्मीद में पहुंचते हैं कि राशन लेकर जल्दी लौटेंगे। लेकिन दिनभर धूप में पसीना बहाने के बाद भी शाम को कई लोगों को बिना राशन लिए ही घर वापस जाना पड़ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि सरकार की योजना तो अच्छी है, लेकिन उसे लागू करने का तरीका बेहद कष्टदायक है।
प्रशासन का पक्ष
इस अव्यवस्था पर एसडीएम आनंद राम नेताम ने कहा:
“वितरण में देरी की खबरें मिली हैं। हम जल्द ही विभाग के साथ चर्चा कर केंद्रों पर भीड़ कम करने और प्रक्रिया को तेज करने के लिए ठोस कदम उठाएंगे। हर पात्र व्यक्ति को उनका तीन महीने का राशन जरूर मिलेगा।”
मुख्य बिंदु:
- भीड़ का दबाव: केवल 2 केंद्रों पर हजारों लोगों का बोझ।
- तकनीकी बाधा: बार-बार बायोमेट्रिक और ओटीपी में लग रहा समय।
- मानवीय संकट: भीषण गर्मी में बुजुर्गों और महिलाओं की परेशानी।
