रामानुजगंज में राशन वितरण का ‘ट्रिपल डोज’: कागजों पर राहत, पर जमीन पर ‘आफत’ की आशंका
रामानुजगंज: छत्तीसगढ़ सरकार ने अप्रैल माह में तीन महीने का राशन एक साथ देने का बड़ा निर्णय लिया है। सरकार का उद्देश्य तो हितग्राहियों को राहत देना है, लेकिन बलरामपुर जिले के रामानुजगंज में मौजूदा बदइंतजामी के कारण यह निर्णय जनता के लिए सिरदर्द बनता दिख रहा है।

सिर्फ दो दुकानें, सैकड़ों कार्डधारी: कैसे संभलेगी भीड़? रामानुजगंज में राशन वितरण के लिए महज दो उचित मूल्य की दुकानें हैं, जिन पर सैकड़ों कार्डधारियों का भारी दबाव है। हर महीने सर्वर डाउन होने और राशन आपूर्ति में देरी की समस्या के कारण हितग्राहियों को घंटों कतारों में खड़ा होना पड़ता है। अब, जब एक साथ तीन महीने का राशन दिया जाएगा, तो यह भीड़ कई गुना बढ़ जाएगी, जिससे व्यवस्था के चरमराने का खतरा है।
मार्च की कड़वी यादें: 24 तारीख को पहुंचा राशन, कैसे बांटते? पिछले महीने का उदाहरण साफ है कि देरी से हुई आपूर्ति ने वितरण को कितना कठिन बना दिया था। दुकान में 350 कार्डधारी जुड़े हैं, और 24 तारीख को भंडारण होने के कारण अफरा-तफरी मच गई थी। दुकानदारों को देर रात तक काम करना पड़ा, फिर भी कई लोग खाली हाथ रह गए।
क्या है प्रशासन का प्लान? इस मामले पर सहायक खाद्य अधिकारी चंपाकली दिवाकर ने कहा, “पिछली बार जो हितग्राही छूट गए थे, उनका रिकॉर्ड तलब किया गया है। हम 7 से 10 अप्रैल के बीच भंडारण पूरा करने का लक्ष्य लेकर चल रहे हैं।” भीषण गर्मी में हितग्राहियों की परीक्षा पारा तेजी से चढ़ रहा है और ऐसे में भीषण गर्मी में घंटों लाइन में खड़े होना बुजुर्गों और महिलाओं के लिए मुसीबत बन गया है। लाभार्थियों का साफ कहना है कि उन्हें ‘एक साथ तीन महीने का राशन’ नहीं, बल्कि ‘समय पर और सुव्यवस्थित राशन’ चाहिए।
ज्ञान तत्व की अपील: प्रशासन को केवल लक्ष्य (Target) पूरा करने के बजाय, दुकानों पर पीने के पानी, छाया और सर्वर की सुचारु व्यवस्था सुनिश्चित करनी होगी। अन्यथा, सरकार की यह योजना धरातल पर दम तोड़ती नजर आएगी।
