संसद विशेष रिपोर्ट: 2 और 4 फरवरी की घटनाएं, निलंबन, विरोध और बोलने की अनुमति पर विवाद
नई दिल्ली। लोकसभा के बजट सत्र के दौरान 2 फरवरी और 4 फरवरी 2026 की घटनाओं ने संसद की कार्यवाही को कई बार प्रभावित किया। कागज़ फेंकने की घटना, आठ सांसदों का निलंबन, प्रधानमंत्री की सीट के निकट विरोध, और नेता प्रतिपक्ष को बोलने की अनुमति न दिए जाने का विवाद इन घटनाओं के केंद्र में रहे।
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2 फरवरी: कागज़ फेंकने की घटना और निलंबन
2 फरवरी को राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव के दौरान नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने चीन से जुड़े मुद्दे पर बोलने की अनुमति मांगी। अध्यक्ष ने तत्काल अनुमति नहीं दी। इसके बाद विपक्षी सांसदों ने विरोध जताया और हंगामा हुआ। इसी दौरान कुछ सदस्यों द्वारा स्पीकर की ओर कागज़ फेंके जाने की घटना हुई।
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने इसे सदन की गरिमा के प्रतिकूल आचरण बताते हुए आठ सांसदों को पूरे सत्र के लिए निलंबित करने की घोषणा की।
निलंबित सांसदों के नाम:
मणिकम टैगोर (कांग्रेस)
गुरजीत सिंह औजला (कांग्रेस)
अमरिंदर सिंह राजा वरिंग (कांग्रेस)
किरण कुमार रेड्डी (कांग्रेस)
हिबी ईडन (कांग्रेस)
डीन कुरियाकोसे (कांग्रेस)
एस. वेंकटेशन (सीपीएम)
प्रशांत पडोले (कांग्रेस)
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राहुल गांधी को बोलने से रोकने पर विवाद
इस पूरे घटनाक्रम का एक महत्वपूर्ण पहलू नेता प्रतिपक्ष को तत्काल बोलने की अनुमति न दिए जाने से जुड़ा रहा।
अध्यक्ष पक्ष का तर्क:
चर्चा का क्रम और वक्ताओं की सूची पूर्व निर्धारित थी।
उस समय सदन में राष्ट्रपति अभिभाषण पर केंद्रित चर्चा चल रही थी।
अध्यक्ष के अनुसार विषय से हटकर हस्तक्षेप की अनुमति देना नियमों के अनुरूप नहीं था।
विपक्ष का पक्ष:
राहुल गांधी का कहना है कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दे पर नेता प्रतिपक्ष को बोलने का अवसर मिलना चाहिए।
कांग्रेस का आरोप है कि विपक्ष की आवाज को सीमित किया जा रहा है।
यह विवाद आगे के हंगामे की पृष्ठभूमि बना।
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4 फरवरी: प्रधानमंत्री की सीट के निकट प्रदर्शन
4 फरवरी को प्रधानमंत्री के संबोधन से पहले विपक्ष की कुछ महिला सांसद वेल में पहुंचीं और प्रधानमंत्री की निर्धारित सीट के आसपास खड़ी होकर विरोध दर्ज कराया। उनके हाथों में विभिन्न मुद्दों से जुड़े पोस्टर थे।
इस बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संबोधन निर्धारित समय पर नहीं हो सका और सदन की कार्यवाही अगले दिन तक स्थगित कर दी गई।
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स्पीकर का बयान
अध्यक्ष ओम बिरला ने मीडिया से बातचीत में कहा कि उन्हें कुछ इनपुट मिले थे जिनके आधार पर उन्होंने प्रधानमंत्री को उस समय सदन में न आने की सलाह दी। उनके अनुसार अप्रत्याशित स्थिति की आशंका को देखते हुए यह निर्णय लिया गया।
उन्होंने कहा कि सदन की मर्यादा और सुरक्षा सर्वोपरि है।
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राहुल गांधी और प्रियंका गांधी की प्रतिक्रिया
राहुल गांधी ने कहा कि विपक्ष को बोलने से रोका जाना लोकतांत्रिक परंपराओं के अनुरूप नहीं है। उन्होंने स्पीकर के बयान पर भी प्रश्न उठाए।
प्रियंका गांधी ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री के प्रति किसी प्रकार की शारीरिक आक्रामकता की बात निराधार है। उनके अनुसार विरोध संसदीय प्रक्रिया के तहत था और यह नेता प्रतिपक्ष को बोलने का अवसर न मिलने के विरोध में था।
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अन्य सांसदों की प्रतिक्रियाएं
भाजपा सांसद मनोज तिवारी ने कहा कि प्रधानमंत्री की सीट के निकट विरोध सुनियोजित था।
भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने हंगामे के लिए विपक्ष को जिम्मेदार ठहराया।
समाजवादी पार्टी के सांसद रामगोपाल यादव ने कहा कि ऐसी स्थिति नहीं बननी चाहिए थी और सभी पक्षों को संयम रखना चाहिए।
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आगे की स्थिति
लगातार व्यवधानों के बीच बजट सत्र की कार्यवाही प्रभावित हुई है। अध्यक्ष ने सभी दलों से सहयोग की अपील की है। बोलने की अनुमति, संसदीय मर्यादा और सुरक्षा प्रोटोकॉल को लेकर बहस जारी है।
यह पूरा घटनाक्रम संसदीय प्रक्रियाओं और राजनीतिक संवाद की प्रकृति पर व्यापक चर्चा का विषय बना हुआ है।

