डिजिटल इंडिया में ‘AI’ पर नकेल: 20 फरवरी से लागू हुए नए IT नियम, उल्लंघन पर जेल की तैयारी
नई दिल्ली | भारत सरकार ने डिजिटल स्पेस को सुरक्षित और जवाबदेह बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) द्वारा तैयार किए गए कंटेंट को विनियमित करने के लिए सूचना प्रौद्योगिकी (IT) नियमों में किए गए संशोधन 20 फरवरी, 2026 से पूरे देश में प्रभावी हो गए हैं।
नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित ‘एआई इंपैक्ट समिट’ के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्पष्ट किया कि डीपफेक और गढ़ा हुआ कंटेंट (Fabricated Content) हमारे लोकतांत्रिक ताने-बाने के लिए बड़ा खतरा है।

📌 मुख्य बदलाव: जो अब हर यूजर और प्लेटफॉर्म के लिए अनिवार्य हैं
सरकार ने IT (डिजिटल मीडिया एथिक्स कोड) रूल्स 2021 में संशोधन कर ‘सिंथेटिकली जेनरेटेड जानकारी’ (SGI) को परिभाषित किया है। इसके तहत अब सोशल मीडिया पर बिना सोचे-समझे AI कंटेंट साझा करना भारी पड़ सकता है।
अनिवार्य लेबलिंग और वाटरमार्क: AI द्वारा निर्मित किसी भी फोटो, वीडियो या ऑडियो पर स्पष्ट ‘वाटरमार्क’ होना अनिवार्य है। इसे हटाना अब कानूनन अपराध माना जाएगा।
3 घंटे की डेडलाइन: आपत्तिजनक कंटेंट को हटाने की समय सीमा 36 घंटे से घटाकर मात्र 3 घंटे कर दी गई है। प्लेटफॉर्म्स को अब शिकायतों पर बिजली की गति से एक्शन लेना होगा।
नो-गो जोन (No-Go Zones): बच्चों से जुड़ी अश्लील सामग्री, फर्जी दस्तावेज और हथियारों से संबंधित डीपफेक कंटेंट पर ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति रहेगी।
🛡️ डिजिटल सुरक्षा के लिए ‘ट्रिपल अटैक’
सरकार ने डिजिटल पारिस्थितिकी तंत्र को सुरक्षित बनाने के लिए तीन बड़े बदलाव किए हैं:
ऑटोमेटेड वेरिफिकेशन: सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को ऐसे टूल्स विकसित करने होंगे जो AI कंटेंट को अपलोड होते ही पहचान सकें।
नियमित अवेयरनेस: हर प्लेटफॉर्म को अपने यूजर्स को हर 3 महीने में चेतावनी देनी होगी कि AI का दुरुपयोग करने पर जुर्माना या जेल हो सकती है।
सोर्स ट्रैकिंग: कंपनियों को ऐसी कोडिंग का उपयोग करना होगा जिससे यह पता चल सके कि AI कंटेंट मूल रूप से किस प्लेटफॉर्म पर तैयार किया गया था।
⚖️ सख्त कानूनी कार्रवाई और सजा
नए नियमों की अनदेखी करने पर अब केवल जुर्माना ही नहीं, बल्कि भारतीय न्याय संहिता (BNS), भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता और पोक्सो (POCSO) एक्ट के तहत आपराधिक मामले दर्ज किए जा सकते हैं।
विशेष नोट: सरकार ने स्पष्ट किया है कि फोटो या वीडियो में सामान्य एडिटिंग (जैसे कलर करेक्शन) को इस श्रेणी में नहीं रखा जाएगा, लेकिन किसी व्यक्ति, घटना या स्थान को बदलने वाले ‘सिंथेटिक कंटेंट’ पर नियम सख्ती से लागू होंगे।
