ऐतिहासिक फैसला: अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप के वैश्विक टैरिफ को किया रद्द, राष्ट्रपति की शक्तियों पर लगाई लगाम
वॉशिंगटन | अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के आर्थिक एजेंडे के मुख्य स्तंभ को ढहाते हुए उनके द्वारा लगाए गए व्यापक वैश्विक टैरिफ (Global Tariffs) को असंवैधानिक घोषित कर दिया है। शुक्रवार को आए इस 6-3 के ऐतिहासिक फैसले ने न केवल वैश्विक व्यापार युद्ध की संभावनाओं को फिलहाल रोक दिया है, बल्कि अमेरिका में ‘शक्तियों के पृथक्करण’ के सिद्धांत को भी फिर से स्थापित किया है।संविधान ने संसद को दी है कर लगाने की शक्तिमुख्य न्यायाधीश जॉन रॉबर्ट्स ने बहुमत की राय लिखते हुए स्पष्ट किया कि राष्ट्रपति ने 1977 के ‘इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट’ (IEEPA) का गलत इस्तेमाल किया है। अदालत ने कहा:अनन्य अधिकार: अमेरिकी संविधान के तहत कर (Tax) लगाने और अंतरराष्ट्रीय व्यापार को विनियमित करने का अधिकार केवल कांग्रेस (अमेरिकी संसद) के पास है।शक्तियों का उल्लंघन: राष्ट्रपति को मनमाने ढंग से ऐसे व्यापक कर लगाने की शक्ति संविधान निर्माताओं ने नहीं दी थी।स्पष्ट संदेश: “IEEPA कानून राष्ट्रपति को आपातकाल में लेनदेन को नियंत्रित करने की शक्ति देता है, लेकिन यह उन्हें एकतरफा कर (Tariff) लगाने का लाइसेंस नहीं देता।”बाजार में खुशी, ट्रंप ने फैसले को बताया ‘अपमानजनक’अदालत के इस फैसले का वैश्विक बाजारों ने स्वागत किया है। यूरोपीय संघ, चीन, भारत और कनाडा जैसे देशों के साथ अमेरिका के बढ़ते व्यापारिक तनाव में अब कमी आने की उम्मीद है।वैश्विक प्रभाव: अर्थशास्त्रियों के अनुसार, यदि ये टैरिफ जारी रहते, तो वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) टूट सकती थी और अमेरिका में महंगाई चरम पर पहुँच जाती।ट्रंप की प्रतिक्रिया: राष्ट्रपति ट्रंप ने इस फैसले पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए इसे “देश के लिए अपमानजनक” बताया। हालांकि, उन्होंने तुरंत वैकल्पिक रास्ते के रूप में 10% का एक नया अस्थायी टैरिफ लगाने की घोषणा की है, जो कानूनन केवल 150 दिनों तक प्रभावी रह सकता है।$175 बिलियन की रिफंड का संकटसुप्रीम कोर्ट के इस फैसले ने अमेरिकी ट्रेजरी (खजाने) के सामने एक नई मुश्किल खड़ी कर दी है। अनुमान के मुताबिक, ट्रंप प्रशासन ने अब तक इन टैरिफ के जरिए लगभग $175 बिलियन से अधिक का राजस्व एकत्र किया है। अब जब ये टैरिफ अवैध घोषित हो चुके हैं, तो आयातक कंपनियाँ इस बड़ी राशि के रिफंड की मांग कर सकती हैं।एक नजर में फैसला:मुख्य बिंदुविवरणबहुमत6-3 (6 न्यायाधीश पक्ष में, 3 विपक्ष में)आधारसंविधान का अनुच्छेद-1 (Article I)प्रभावित देशभारत, चीन, यूरोपीय संघ, कनाडा, मेक्सिको आदिमुख्य मुद्दाक्या राष्ट्रपति बिना संसद के कर लगा सकते हैं? (नतीजा: नहीं)

