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Delhi University में UGC इक्विटी नियमों पर टकराव, पत्रकार रुचि तिवारी पर हमले से कैंपस में उबाल

नई दिल्ली, 14 फरवरी 2026। नॉर्थ कैंपस में 13 फरवरी को UGC के इक्विटी रेगुलेशंस के समर्थन में निकाली गई “अधिकार रैली” हिंसक झड़पों में बदल गई। इस दौरान पत्रकार रुचि तिवारी के साथ कथित मारपीट और धमकी की घटना सामने आई, जिसने छात्र राजनीति के भीतर जाति और विचारधारा के टकराव को फिर केंद्र में ला दिया है।

 

विवाद की जड़: UGC इक्विटी रेगुलेशंस 2026

 

University Grants Commission ने 13 जनवरी 2026 को “प्रमोशन ऑफ इक्विटी इन हायर एजुकेशनल इंस्टीट्यूशंस रेगुलेशंस” जारी किए। इसके तहत विश्वविद्यालयों में इक्वल ऑपर्च्युनिटी सेंटर, इक्विटी कमेटी, 24×7 हेल्पलाइन और भेदभाव संबंधी शिकायतों की त्वरित जांच की व्यवस्था का प्रावधान है।

समर्थक गुटों का कहना है कि ये नियम SC, ST और OBC छात्रों को संस्थागत सुरक्षा देंगे। वहीं विरोधी संगठनों ने इन्हें “राजनीतिक हस्तक्षेप” और “चयनात्मक नैरेटिव” बताते हुए सुप्रीम कोर्ट में लंबित याचिकाओं का हवाला दिया और रोलबैक की मांग की।

 

रैली और प्रतिरोध: आमने-सामने छात्र संगठन

 

रैली में ABVP और आरक्षित वर्ग के छात्र समूहों ने अंबेडकर और फुले के पोस्टरों के साथ मार्च निकाला। जवाब में AISA और SFI सहित वामपंथी संगठनों ने “वंचित अधिकार दिवस” मनाते हुए जातिगत भेदभाव के खिलाफ प्रदर्शन किया।

आर्ट्स फैकल्टी परिसर में दोनों पक्षों के बीच नारेबाजी तेज हुई, जो धक्का-मुक्की में बदल गई। इसी दौरान इतिहासकार Irfan Habib पर पानी और कूड़ा फेंके जाने की भी खबरें सामने आईं, जिससे माहौल और तनावपूर्ण हो गया।

 

रुचि तिवारी का आरोप: भीड़ ने घेरा, धमकियां दीं

 

रैली को कवर करने पहुंचीं पत्रकार रुचि तिवारी ने आरोप लगाया कि कुछ लोगों ने उनका नाम और जाति पूछने के बाद उन्हें घेर लिया। उनके अनुसार भीड़ में मौजूद कुछ लोगों ने अभद्र टिप्पणियां कीं, बाल खींचे और जान से मारने व यौन हिंसा की धमकी दी।

प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि स्थिति करीब आधे घंटे तक अराजक रही। बाद में लॉ फैकल्टी के छात्रों और महिला पुलिसकर्मियों ने हस्तक्षेप कर उन्हें बाहर निकाला। घटना के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गए हैं।

 

पुलिस कार्रवाई और प्रशासन की प्रतिक्रिया

 

दिल्ली पुलिस ने विभिन्न धाराओं में प्राथमिकी दर्ज की है, जिनमें जातीय वैमनस्य फैलाने और आपराधिक धमकी से जुड़ी धाराएं शामिल हैं। वीडियो फुटेज की जांच की जा रही है, हालांकि खबर लिखे जाने तक किसी गिरफ्तारी की पुष्टि नहीं हुई थी।

विश्वविद्यालय प्रशासन ने शांति की अपील करते हुए कहा है कि मामले की आंतरिक समीक्षा की जाएगी और न्यायिक प्रक्रिया का सम्मान किया जाएगा। कुलपति ने छात्रों से संयम बरतने और सुप्रीम कोर्ट के फैसले का इंतजार करने को कहा है।

 

राजनीतिक बयानबाजी तेज

 

घटना के बाद सियासी बयानबाजी भी तेज हो गई है। भाजपा और ABVP ने इसे वामपंथी हिंसा बताया और सख्त कार्रवाई की मांग की। वहीं AISA ने आरोपों को “राजनीतिक रंग” देने की कोशिश करार दिया और कहा कि असली मुद्दा सामाजिक न्याय का है।

 

कैंपस फिलहाल शांत है, लेकिन माहौल संवेदनशील बना हुआ है। छात्र संगठनों ने आने वाले दिनों में फिर से बैठक और विरोध कार्यक्रमों के संकेत दिए हैं। इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि विश्वविद्यालय परिसर संवाद का मंच रहेंगे या वैचारिक युद्धभूमि बनते जाएंगे।

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