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बिहार की राजनीति में ‘सम्राट’ का राज्याभिषेक: भाजपा ने पहली बार संभाली सूबे की कमान

पटना: बिहार के सियासी गलियारों में मंगलवार को एक बड़ा बदलाव देखने को मिला। नीतीश कुमार के पद त्यागने के साथ ही राज्य में ‘भाजपा युग’ का औपचारिक आगाह हो गया है। सम्राट चौधरी ने बिहार के 24वें मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ लेकर इतिहास रच दिया। यह पहला मौका है जब भाजपा का कोई कार्यकर्ता मुख्यमंत्री के रूप में बिहार की कमान संभाल रहा है।

राजभवन में आयोजित भव्य समारोह में राज्यपाल सैयद अताउल हसनैन ने उन्हें पद की शपथ दिलाई। इस चयन के पीछे केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान की महत्वपूर्ण भूमिका रही, जिन्होंने संशय की स्थिति को समाप्त कर सम्राट के नाम पर मुहर लगवाई।

विरासत में मिली राजनीति, सबसे युवा मंत्री का सफर

मुंगेर जिले के लखनपुर गांव में 16 नवंबर 1968 को जन्मे सम्राट चौधरी (राकेश कुमार) को राजनीति विरासत में मिली है। उनके पिता शकुनी चौधरी बिहार की राजनीति के दिग्गज स्तंभ रहे हैं, वहीं उनकी माता पार्वती देवी ने भी विधानसभा में जनता का प्रतिनिधित्व किया है।

कुर्मी समुदाय से ताल्लुक रखने वाले सम्राट चौधरी की ओबीसी (OBC) वर्ग में गहरी पैठ है, जिसे उनकी इस बड़ी पदोन्नति का मुख्य आधार माना जा रहा है।

RJD से भाजपा तक: एक नजर राजनीतिक उतार-चढ़ाव पर

  • शुरुआत: 1990 में राजद के साथ करियर का आगाज किया और 1999 में राबड़ी देवी सरकार में सबसे कम उम्र के मंत्री बनने का गौरव प्राप्त किया।
  • विधायक: वर्ष 2000 और 2010 में परबत्ता से विधानसभा पहुंचे।
  • भाजपा में उदय: 2017 में भाजपा का दामन थामने के बाद उनकी प्रगति बेहद तेज रही।
  • प्रदेश अध्यक्ष से मुख्यमंत्री: 2023 में प्रदेश अध्यक्ष बने, फिर उपमुख्यमंत्री के रूप में वित्त और स्वास्थ्य जैसे भारी-भरकम मंत्रालय संभाले। 2025 में तारापुर से जीत दर्ज कर अब वे राज्य के शिखर पर काबिज हैं।

चुनौतियां और विवाद

सत्ता के शीर्ष पर पहुँचने वाले सम्राट चौधरी का दामन विवादों से भी अछूता नहीं रहा है। 2025 के चुनावी हलफनामे के मुताबिक, उन पर दो आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं और लोकसभा चुनाव के दौरान आचार संहिता उल्लंघन का भी एक मामला सामने आया था। हलफनामे में उन्होंने अपनी कुल संपत्ति 10 करोड़ रुपये से अधिक घोषित की है।


संपादकीय टिप्पणी: भाजपा की यह ‘ओबीसी आउटरीच’ रणनीति आगामी चुनावों के लिए एक मास्टरस्ट्रोक मानी जा रही है। अब देखना यह होगा कि मुख्यमंत्री के रूप में सम्राट चौधरी बिहार के विकास और प्रशासनिक चुनौतियों से कैसे निपटते हैं।

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