कानून का डंडा: मुआवजा न देने पर पुलिस विभाग पर फिर गिरी गाज, रामानुजगंज थाने की बोलेरो कुर्क
बलरामपुर: अदालत के आदेश को हल्के में लेना पुलिस विभाग को भारी पड़ गया है। मोटर दुर्घटना दावा मामले में सालों बाद भी मुआवजा राशि का भुगतान न करने पर जिला मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण (एमएसीटी) ने पुलिस प्रशासन के खिलाफ बेहद सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट के कड़े निर्देश के बाद रामानुजगंज थाने की सरकारी बोलेरो गाड़ी (CG 03-0038) को कुर्क (जब्त) कर सीधे कोर्ट परिसर में लाकर खड़ा कर दिया गया है।

हैरानी की बात यह है कि इसी मामले में विभाग पर यह दूसरी बड़ी गाज है; इससे पहले कैदियों को ले जाने वाली पुलिस की डग्गा गाड़ी को भी कोर्ट कुर्क कर चुका है।
क्या है पूरा मामला? क्यों आई कुर्की की नौबत?
यह पूरा मामला साल 2021 (प्रकरण क्रमांक 154/2021) का है। इस केस में बीते 3 सितंबर 2025 को हाई कोर्ट ने पीड़ित नारायण यादव एवं अन्य के पक्ष में एक बड़ा फैसला सुनाया था। अदालत ने गृह विभाग को स्पष्ट आदेश दिया था कि पीड़ितों को ब्याज समेत लगभग 48 लाख रुपये की मुआवजा राशि दी जाए। लेकिन समय सीमा बीत जाने के बावजूद जब जिम्मेदार महकमे के कान पर जूं तक नहीं रेंदी, तो कोर्ट को यह सख्त कदम उठाना पड़ा।
पीड़ितों ने खटखटाया कोर्ट का दरवाजा
लंबा इंतजार करने के बाद भी जब मुआवजा राशि नहीं मिली, तो हताश पीड़ित पक्ष ने वरिष्ठ अधिवक्ता आर.के. पटेल के माध्यम से जिला मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण में ‘निष्पादन याचिका’ (Execution Petition) दायर की। मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने पुलिस विभाग की इस लापरवाही पर कड़ा रुख अख्तियार किया और गाड़ी कुर्क करने का वारंट जारी कर दिया।
एक ही केस में दूसरी कुर्की, पुलिस महकमे में हड़कंप सूत्रों की मानें तो पुलिस विभाग के लिए यह बेहद किरकिरी वाली स्थिति है। एक ही मामले में पहले कैदी वाहन और अब थाने की बोलेरो का जब्त होना पूरे इलाके में चर्चा का विषय बना हुआ है।
लाइन में हैं पुलिस की और भी गाड़ियां!
विभागीय सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, पीड़ितों द्वारा दायर याचिका में पुलिस विभाग की कुछ अन्य गाड़ियों की लिस्ट भी शामिल है। कानूनी जानकारों का कहना है कि यदि पुलिस महकमे ने अब भी सुस्ती दिखाई और 48 लाख रुपये का भुगतान जल्द नहीं किया, तो आने वाले दिनों में कोर्ट के आदेश पर पुलिस की कुछ और गाड़ियां भी कानून के शिकंजे में आ सकती हैं।
फिलहाल, इस पूरी कुर्की की कार्रवाई पर पुलिस या गृह विभाग की तरफ से राशि जमा करने को लेकर कोई भी आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
