उत्तरवाहिनी कन्हर के तट पर उमड़ा आस्था का सैलाब: पितृ पक्ष के पहले दिन से ही तर्पण और पिंडदान के लिए जुट रहे श्रद्धालु
रामानुजगंज (बलरामपुर)। धार्मिक मान्यताओं में पतितपावनी गंगा के सदृश उत्तर दिशा की ओर बहने वाली (उत्तरवाहिनी) पवित्र कन्हर नदी के तट इन दिनों गहरी आस्था और आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर हैं। पितृ पक्ष के आरंभ होते ही अपने दिवंगत पूर्वजों की आत्मा की शांति, मोक्ष और उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने के लिए श्रद्धालुओं का हुजूम कन्हर तट पर उमड़ रहा है। रामानुजगंज नगर समेत आसपास के दर्जनों ग्रामीण अंचलों से पहुंचे श्रद्धालु नगर के प्रसिद्ध मां महामाया मंदिर स्थित छठ घाट एवं प्राचीन शिव मंदिर घाट पर विधि-विधान से तर्पण, पिंडदान और जलांजलि अर्पित कर रहे हैं। तड़के से ही दोनों प्रमुख घाटों पर तिल, कुश, अक्षत और जल लेकर तर्पण करने वाले लोगों की कतारें देखने को मिल रही हैं।

पूर्वजों के प्रति श्रद्धा और दायित्व का महापर्व
सनातन परंपरा में पितृ पक्ष को केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि अपनी कुल-परंपरा, संस्कारों और दिवंगत पितरों के प्रति ऋण चुकाने व दायित्व निभाने का सबसे पवित्र पखवाड़ा माना गया है। इन सोलह दिनों की अवधि में लोग अपने पूर्वजों का श्रद्धापूर्वक स्मरण कर तर्पण, पिंडदान, श्राद्ध कर्म, ब्राह्मण भोज और यथाशक्ति दान-पुण्य करते हैं, जिससे परिवार में सुख, शांति और समृद्धि का वास बना रहे।
आध्यात्मिक दृष्टि से कन्हर तट का विशेष महत्व: पंडित जितेंद्र पांडे
मां महामाया मंदिर के प्रधान पुजारी पंडित जितेंद्र पांडे ने बताया कि धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से पितृ पक्ष का विशेष महत्व है। उत्तरवाहिनी नदी के तट पर किया गया तर्पण और श्राद्ध कर्म अक्षय फलदायी माना गया है। उन्होंने कहा कि इन पावन दिनों में पितरों का स्मरण करने से परिवार में पूर्वजों के प्रति आदर, कृतज्ञता और मर्यादा की गौरवशाली परंपरा जीवंत रहती है। उन्होंने श्रद्धालुओं को प्रेरित करते हुए कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को अपने सामर्थ्य, सामयिकता और वैदिक विधि-विधान के अनुसार पितरों के निमित्त पूजन, जल तर्पण और सत्कर्म करना चाहिए।
श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए घाटों पर विशेष सफाई: रमन अग्रवाल
पितृ पक्ष के दौरान दोनों तटों पर उमड़ने वाली भारी भीड़ को देखते हुए नगर पालिका प्रशासन ने व्यापक प्रबंध किए हैं। नगर पालिका अध्यक्ष रमन अग्रवाल ने जानकारी दी कि श्रद्धालुओं की सहूलियत को ध्यान में रखते हुए मां महामाया मंदिर छठ घाट और प्राचीन शिव मंदिर घाट पर विशेष स्वच्छता अभियान चलाकर साफ-सफाई, प्रकाश और अन्य बुनियादी व्यवस्थाएं दुरुस्त कराई गई हैं। उन्होंने बताया कि पूरे पखवाड़े भर निरंतर सफाई व्यवस्था की निगरानी की जा रही है ताकि तर्पण और अनुष्ठान के लिए पहुंचने वाले किसी भी श्रद्धालु को असुविधा का सामना न करना पड़े।
कन्हर नदी के शांत प्रवाह के बीच ब्रह्म मुहूर्त से ही गूंज रहे वैदिक मंत्रोच्चार, शंखनाद और धूप-दीप की सुगंध ने समूचे तट को अलौकिक बना दिया है। आगामी दिनों में पितृ पक्ष की प्रमुख तिथियों और सर्वपितृ मोक्ष अमावस्या पर यहां श्रद्धालुओं की संख्या में और अधिक वृद्धि होने की संभावना है।
