बलरामपुर DEO कार्यालय पर ABVP का हल्लाबोल: किताबें न मिलने पर 10वीं के छात्र पहुंचे रामानुजगंज, 3 दिन का अल्टीमेटम
रामानुजगंज : बलरामपुर जिले में शिक्षा व्यवस्था का हाल बदहाल नजर आ रहा है। वाड्रफनगर के बाद अब जामवंतपुर हायर सेकेंडरी स्कूल के 10वीं कक्षा के छात्र-छात्राएं पाठ्यपुस्तकें (किताबें) न मिलने और बंद पड़ी स्मार्ट क्लास की शिकायत लेकर रामानुजगंज स्थित जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) कार्यालय पहुंचे। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के बैनर तले विद्यार्थियों ने कार्यालय परिसर में जमकर विरोध-प्रदर्शन किया और अपनी मांगों को लेकर ज्ञापन सौंपा।

“PDF प्रिंट कराकर पढ़ो”—प्राचार्य की सलाह से बढ़ी परेशानी
प्रदर्शन में शामिल कक्षा 10वीं की छात्रा तनुश्री मंडल ने अपनी आपबीती बताते हुए कहा कि सत्र बीतने को है और बोर्ड परीक्षाएं सिर पर हैं, लेकिन अब तक उन्हें ‘हेल्थ केयर’ और ‘कंस्ट्रक्शन’ विषय की किताबें नहीं दी गई हैं। जब विद्यार्थियों ने इस संबंध में प्राचार्य से शिकायत की, तो उन्हें 150-200 पन्नों की PDF फाइल खुद से प्रिंट निकलवाकर पढ़ने की गैर-जिम्मेदाराना सलाह दे दी गई। छात्रों का कहना है कि इतने भारी-भरकम पन्नों को प्रिंट कराना उनके लिए आर्थिक और व्यावहारिक रूप से संभव नहीं है। इसके अलावा स्कूल में स्मार्ट क्लास भी ठप पड़ी है।

ABVP ने दागे सवाल: रामानुजगंज HQ छोड़ बलरामपुर से क्यों चल रहा दफ्तर?
ABVP के जिला संयोजक विकास महतो ने शिक्षा विभाग की कार्यशैली को कटघरे में खड़ा करते हुए गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि जिला शिक्षा अधिकारी का मूल मुख्यालय रामानुजगंज है, इसके बावजूद वे यहां नियमित रूप से बैठने के बजाय बलरामपुर से ही कार्यालय चला रहे हैं। महतो ने स्पष्ट अल्टीमेटम दिया, “यदि 3 दिनों के भीतर छात्रों को किताबें उपलब्ध नहीं कराई गईं और स्मार्ट क्लास चालू नहीं हुआ, तो विद्यार्थी परिषद उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होगी, जिसकी पूरी जिम्मेदारी विभाग की होगी।”
विभाग की सफाई: 1-2 दिन में मिलेंगी किताबें
पूरे मामले में DEO कार्यालय रामानुजगंज की सहायक संचालक आशा रानी टोप्पो ने बताया कि छात्रों का ज्ञापन प्राप्त हुआ है। शासन स्तर से ही हेल्थ केयर और कंस्ट्रक्शन विषय की पुस्तकें उपलब्ध नहीं हो सकी थीं। उन्होंने दावा किया कि एक से दो दिनों के भीतर किताबें प्राप्त होने की संभावना है, जिसके तुरंत बाद उनका वितरण छात्रों को कर दिया जाएगा।
बोर्ड परीक्षा की दहलीज पर खड़े छात्रों की यह परेशानी जिले में शिक्षा व्यवस्था की पोल खोल रही है। अब देखना होगा कि विभाग वादे के मुताबिक कितनी जल्दी छात्रों तक किताबें पहुंचा पाता है।
