एकलव्य आवासीय विद्यालय में सीनियर छात्रों की दबंगई: 9वीं के 8 मासूमों को बेदम पीटा, हॉस्टल अधीक्षक ने मामला दबाने की कोशिश
बलरामपुर : जिला मुख्यालय स्थित आवासीय एकलव्य विद्यालय में रैगिंग और मारपीट का सनसनीखेज मामला सामने आया है। 12वीं कक्षा के सीनियर छात्रों ने 9वीं कक्षा में पढ़ने वाले 8 मासूम विद्यार्थियों के साथ बेरहमी से मारपीट की। घटना के बाद मंगलवार को जब घायल बच्चों के शरीर पर गंभीर चोटों के निशान देखकर परिजन पहुंचे, तो हड़कंप मच गया। आक्रोशित परिजन, स्कूल प्रबंधन और हॉस्टल अधीक्षक के साथ घायल बच्चों को लेकर जिला अस्पताल पहुंचे, जहां उनका डॉक्टरी मुलायजा व इलाज कराया गया।

6 सितंबर को हुई वारदात, हॉस्टल में ही मामले को दबाने का आरोप
पीड़ित बच्चों और उनके परिजनों ने बताया कि घटना 6 सितंबर की शाम करीब 7 बजे की है। 12वीं के छात्रों ने 9वीं के 8 बच्चों को निशाना बनाते हुए उनकी जमकर पिटाई की। आरोप है कि पीड़ित बच्चों ने तत्काल हॉस्टल अधीक्षक को अपनी आपबीती सुनाई, लेकिन अधीक्षक ने स्थिति को गंभीरता से लेने के बजाय बच्चों का हॉस्टल में ही मामूली प्राथमिक उपचार कराकर मामले को दबाने का प्रयास किया। न तो बच्चों को समय पर अस्पताल पहुंचाया गया और न ही उनके परिजनों को कोई सूचना दी गई।
मंगलवार को परिजनों को लगी भनक, सिर और हाथ पर मिले गंभीर चोट के निशान
मंगलवार सुबह जब परिजनों को गुप्त सूचना मिली और वे भागते हुए विद्यालय पहुंचे, तो बच्चों के सिर, हाथ और पीठ पर उभरे चोट के निशान देखकर दंग रह गए। परिजनों ने हॉस्टल प्रबंधन पर लापरवाही और संवेदनहीनता का आरोप लगाते हुए जमकर खरी-खोटी सुनाई। परिजनों का कहना है कि यदि समय पर सूचना मिलती और उचित इलाज कराया जाता, तो मासूमों को 3 दिन तक दर्द से नहीं तड़पना पड़ता।

जनप्रतिनिधि ने उठाए सवाल: हॉस्टल प्रबंधन की मंशा पर संदेह
मामले की सूचना मिलते ही अस्पताल पहुंचे जिला पंचायत सदस्य रामप्रताप सिंह ने कहा कि मासूम बच्चों के साथ हुई इस बर्बर घटना की जानकारी तत्काल परिजनों को दी जानी चाहिए थी। उन्होंने हॉस्टल अधीक्षक की कार्यप्रणाली पर कड़े सवाल खड़े करते हुए कहा कि मामले को छुपाने और समय पर बच्चों का इलाज न कराने वाले जिम्मेदार अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
अस्पताल में परिजनों के भारी जमावड़े के बाद अब स्कूल प्रबंधन और हॉस्टल अधीक्षक की भूमिका जांच के दायरे में आ गई है। सवाल यह उठ रहा है कि आखिर आवासीय विद्यालय जैसे सुरक्षित माहौल में सीनियर छात्रों की इस दबंगई पर प्रबंधन का नियंत्रण क्यों नहीं है।
