बलरामपुर में धान घोटाला! रिकॉर्ड में हजारों क्विंटल धान, मौके पर सन्नाटा; प्रशासन ने 24 घंटे में मांगा जवाब
बलरामपुर-रामानुजगंज: जिले के त्रिकुंडा धान खरीदी केंद्र में प्रशासनिक जांच के दौरान एक बड़ी गड़बड़ी सामने आई है। कलेक्टर कार्यालय की खाद्य शाखा द्वारा की गई कार्रवाई से पूरे विभाग में हड़कंप मच गया है। भौतिक सत्यापन के दौरान केंद्र में धान का स्टॉक रिकॉर्ड से काफी कम पाया गया, जिसे शासन के नियमों का खुला उल्लंघन माना जा रहा है।

निरीक्षण में खुली पोल
बीते 19 अप्रैल 2026 को राजस्व, खाद्य और मार्कफेड विभाग की एक संयुक्त टीम ने त्रिकुंडा केंद्र का आकस्मिक दौरा किया था। जब वहां मौजूद धान की बोरियों (बारदानों) की गिनती की गई, तो ऑनलाइन दर्ज आंकड़ों और मौके पर मौजूद माल में जमीन-आसमान का अंतर मिला।

- रिकॉर्ड के अनुसार: केंद्र में 9498 बारदानों में कुल 4056.83 क्विंटल धान होना चाहिए था।
- मौके पर स्थिति: केवल 5421 बारदाने ही पाए गए।
- कुल कमी: जांच में 1630.80 क्विंटल धान (4077 बारदाने) गायब मिला।
इन कर्मचारियों पर गिरी गाज

इस गंभीर लापरवाही के लिए प्रशासन ने सीधे तौर पर तीन लोगों को जिम्मेदार ठहराते हुए उन्हें ‘कारण बताओ नोटिस’ थमाया है:
- दीपक यादव (तत्कालीन खरीदी प्रभारी)
- रिशु कश्यप (वर्तमान खरीदी प्रभारी)
- श्रीमती जीवन्ती तिर्की (कंप्यूटर ऑपरेटर)
नोटिस में स्पष्ट किया गया है कि इन कर्मचारियों का व्यवहार खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 की सरकारी नीति के विरुद्ध है और यह उनकी कार्यशैली में घोर अनुशासनहीनता को दर्शाता है।

“प्रशासनिक चेतावनी: यदि 24 घंटे के भीतर संतोषजनक स्पष्टीकरण नहीं दिया गया, तो विभाग संबंधितों के खिलाफ एकपक्षीय दंडात्मक कार्रवाई और वसूली की प्रक्रिया शुरू करेगा।”
भ्रष्टाचार की आशंका और सख्त रुख
इतनी बड़ी मात्रा में धान की कमी केवल तकनीकी चूक नहीं बल्कि एक बड़ी वित्तीय अनियमितता की ओर इशारा कर रही है। जिले में चर्चा है कि यदि समय रहते यह औचक निरीक्षण नहीं होता, तो शासन को लाखों रुपये का चूना लग सकता था। फिलहाल, प्रशासन के इस कड़े रुख से अन्य खरीदी केंद्रों में भी हड़कंप की स्थिति है। अब देखना यह होगा कि आरोपी कर्मचारियों के जवाब के बाद प्रशासन निलंबन या एफआईआर जैसी क्या कार्रवाई करता है।
