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रामानुजगंज में गणेशोत्सव की धूम: पूजा पंडालों में पहुंचे जिला पंचायत उपाध्यक्ष धीरज सिंहदेव, डीजे विवाद पर बोले—’कम साउंड में मिले अनुमति’

रामानुजगंज (बलरामपुर)। रामानुजगंज नगर इन दिनों गणेशोत्सव के उल्लास और भक्ति के रंग में सराबोर है। नगर के विभिन्न प्रमुख चौक-चौराहों और मोहल्लों में स्थापित भव्य व आकर्षक पूजा पंडालों में सुबह-शाम श्रद्धालुओं का तांता लग रहा है। विगत 14 सितंबर को वैदिक मंत्रोच्चार के साथ भगवान विघ्नहर्ता की प्रतिमाओं की स्थापना के बाद से ही अनवरत पूजा-अर्चना, आरती और महाभंडारे का दौर जारी है।

इसी कड़ी में बलरामपुर जिला पंचायत उपाध्यक्ष धीरज सिंहदेव मंगलवार देर शाम नगर के भ्रमण पर पहुंचे। उन्होंने रामानुजगंज के विभिन्न गणेश पूजा पंडालों में पहुंचकर भगवान गजानन के दर्शन किए, विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर क्षेत्र की सुख, शांति और समृद्धि की कामना की। दर्शन-पूजन के उपरांत उन्होंने आयोजन समितियों द्वारा आयोजित महाभंडारे में बैठकर प्रसाद ग्रहण किया तथा विभिन्न समितियों के पदाधिकारियों व कार्यकर्ताओं से भेंटकर व्यवस्थाओं की जानकारी ली।

10-15 वर्षों से कायम है परंपरा, नगर में उत्सव का माहौल

मीडिया से चर्चा करते हुए धीरज सिंहदेव ने कहा कि रामानुजगंज में गणेशोत्सव मनाने की समृद्ध परंपरा रही है। कई पूजा समितियां पिछले 10 से 15 वर्षों से निरंतर अत्यंत भव्य और अनुशासित तरीके से इस पावन पर्व का आयोजन करती आ रही हैं। इस वर्ष भी समितियों द्वारा बनाए गए मनोहारी पंडाल और सजीव झांकियां नगर के धार्मिक वातावरण को और अधिक भव्य बना रही हैं।

डीजे विवाद पर खुलकर बोले: ‘नियंत्रित साउंड के साथ मिले छूट’

हाल ही में डीजे संचालन को लेकर उपजे विवाद पर पूछे गए सवाल पर जिला पंचायत उपाध्यक्ष ने व्यावहारिक रुख अपनाते हुए अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि उच्च न्यायालय के निर्देशों का सम्मान और पालन सर्वोपरि है, परंतु इस बात से भी इनकार नहीं किया जा सकता कि पारंपरिक धार्मिक अनुष्ठानों व विसर्जन यात्राओं में साउंड सिस्टम के बिना आयोजकों को व्यावहारिक दिक्कतें आती हैं।

उन्होंने कहा कि शासन और प्रशासन को पूरी तरह रोक लगाने के बजाय बीच का रास्ता निकालना चाहिए, जिसके तहत ध्वनि की सीमा (डेसिबल लिमिट) तय कर कम आवाज में संचालन की अनुमति दी जा सकती है। उन्होंने तर्क देते हुए कहा कि 15 अगस्त और 26 जनवरी जैसे प्रमुख राष्ट्रीय व शासकीय पर्वों पर भी पुलिस और प्रशासन द्वारा डीजे का उपयोग किया जाता है। ऐसे में न्यायालयीन मर्यादाओं के दायरे में रहकर न्यूनतम आवाज के साथ धार्मिक आयोजनों में भी इसके मर्यादित उपयोग पर विचार किया जाना चाहिए।

25 सितंबर को होगा विसर्जन

नगर में अब विभिन्न पूजा समितियां विसर्जन समारोह की अंतिम तैयारियों में जुट गई हैं। आगामी 25 सितंबर को गाजे-बाजे और शोभायात्राओं के साथ प्रतिमाओं का विसर्जन कर इस दस दिवसीय महापर्व का विधिवत समापन किया जाएगा।

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