NH-343 को लेकर हाईकोर्ट का आदेश: 30 दिनों में विस्तृत अभ्यावेदन देने की मिली स्वतंत्रता
रामानुजगंज में मुख्य मार्ग के स्थान पर रिंग रोड की मांग से जुड़ी याचिका का निस्तारण, अधिकारियों को 90 दिनों में निर्णय लेने का निर्देश
रामानुजगंज। अंबिकापुर-रामानुजगंज राष्ट्रीय राजमार्ग क्रमांक 343 (NH-343) के निर्माण में रामानुजगंज शहर के भीतर प्रस्तावित मार्ग और रिंग रोड के विकल्प को लेकर दायर याचिका पर छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय, बिलासपुर ने 24 सितंबर 2026 को आदेश पारित किया है। न्यायमूर्ति राकेश मोहन पांडे की एकल पीठ ने WPC No. 4621 of 2026 का निस्तारण करते हुए याचिकाकर्ता को संबंधित अधिकारियों के समक्ष विस्तृत अभ्यावेदन प्रस्तुत करने की स्वतंत्रता दी है।

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याचिका रामानुजगंज निवासी नवीन चंद्र तिवारी द्वारा दायर की गई थी। याचिका में कहा गया था कि वर्ष 2020 में अंबिकापुर से रामानुजगंज तक NH-343 के निर्माण को मंजूरी दी गई थी। याचिकाकर्ता के अनुसार, प्रारंभिक Detailed Project Report (DPR) में रामानुजगंज नगर के भीतर से सड़क निर्माण का प्रस्ताव था, जबकि शहर के बाहर रिंग रोड का प्रावधान नहीं किया गया था।
याचिकाकर्ता की ओर से अदालत में यह भी बताया गया कि स्थानीय नागरिकों और स्थानीय विधायक द्वारा उठाई गई आपत्तियों के बाद रिंग रोड अथवा वैकल्पिक मार्ग से संबंधित नया प्रस्ताव तैयार किया गया था। इसके लिए संबंधित विभाग द्वारा 12 सितंबर 2025 और 10 फरवरी 2025 को प्रस्ताव भेजे जाने का उल्लेख भी न्यायालय के समक्ष किया गया।
अधिकारियों ने याचिका का विरोध किया
सुनवाई के दौरान केंद्र एवं राज्य सरकार की ओर से उपस्थित अधिवक्ताओं ने याचिका का विरोध करते हुए कहा कि याचिकाकर्ता को DPR में बदलाव के संबंध में अधिकारियों को निर्देश देने की मांग करने का अधिकार नहीं है और याचिका खारिज की जानी चाहिए।
न्यायालय ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद मामले के गुण-दोष पर कोई टिप्पणी नहीं की। आदेश में कहा गया कि याचिकाकर्ता संबंधित दस्तावेजों के साथ 30 दिनों के भीतर विस्तृत अभ्यावेदन संबंधित अधिकारियों के समक्ष प्रस्तुत कर सकता है।
न्यायालय ने यह भी निर्देश दिया कि यदि ऐसा अभ्यावेदन प्रस्तुत किया जाता है तो संबंधित अधिकारी उसे कानून के अनुसार, अधिमानतः अगले 90 दिनों के भीतर, निर्णय करें।
इस निर्देश के साथ हाईकोर्ट ने याचिका का निस्तारण कर दिया। महत्वपूर्ण रूप से, आदेश में रिंग रोड के निर्माण अथवा DPR में बदलाव को लेकर कोई अंतिम आदेश नहीं दिया गया है, बल्कि संबंधित अधिकारियों के समक्ष अभ्यावेदन प्रस्तुत करने और उस पर कानून के अनुसार निर्णय लेने का रास्ता खुला रखा गया है।
शहर में निर्माण कार्य को लेकर अफवाहों से बचने की अपील
इधर रामानुजगंज में आरटीओ बैरियर से रामानुजगंज नाका तक NH-343 पर चल रहे निर्माण कार्य को लेकर नागरिकों के बीच चर्चा के बीच एक अपील जारी की गई है। इसमें कहा गया है कि वर्तमान निर्माण की चौड़ाई पूर्ववत रहेगी और निर्माण कार्य के कारण स्थानीय निवासियों को किसी प्रकार का नुकसान नहीं होगा।
अपील में नागरिकों से किसी भी प्रकार की अफवाह पर ध्यान नहीं देने की बात कही गई है। साथ ही निर्माण से संबंधित किसी समस्या या जानकारी के लिए चंदनपुर स्थित ठेकेदार के कार्यालय में संपर्क करने की बात कही गई है।
क्या है हाईकोर्ट के आदेश का वास्तविक अर्थ?
हाईकोर्ट के आदेश के अनुसार फिलहाल NH-343 के रूट या रिंग रोड के संबंध में कोई अंतिम न्यायिक निर्णय नहीं हुआ है। अदालत ने केवल याचिकाकर्ता को अपने पक्ष और संबंधित दस्तावेजों के साथ विस्तृत अभ्यावेदन देने की अनुमति दी है। इसके बाद संबंधित अधिकारियों को उस अभ्यावेदन पर कानून के अनुसार निर्णय लेना होगा।
इसलिए वर्तमान स्थिति में यह कहना उचित होगा कि रिंग रोड को हाईकोर्ट ने मंजूरी दे दी है या मौजूदा निर्माण रोकने का आदेश दिया है, ऐसा आदेश में नहीं कहा गया है। आगे की स्थिति संबंधित अधिकारियों द्वारा अभ्यावेदन पर लिए जाने वाले निर्णय पर निर्भर करेगी।
