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मेवाड़ यूनिवर्सिटी नर्सिंग विवाद पर चेयरमैन डॉ. अशोक गदिया का पक्ष: “छात्रों का भविष्य पूरी तरह सुरक्षित”

चित्तौड़गढ़ जिले के गंगरार स्थित मेवाड़ यूनिवर्सिटी में बीएससी नर्सिंग और जीएनएम कोर्स की मान्यता को लेकर पिछले कुछ समय से चल रहा विवाद अब धीरे-धीरे शांत होने की ओर बढ़ता दिखाई दे रहा है। यूनिवर्सिटी के चेयरमैन डॉ. अशोक कुमार गदिया ने सामने आकर पूरे मामले पर अपना पक्ष रखते हुए छात्रों और अभिभावकों को आश्वस्त किया है कि किसी भी विद्यार्थी के भविष्य के साथ कोई अन्याय नहीं होने दिया जाएगा और सभी प्रक्रियाएँ नियमानुसार पूरी की जा रही हैं।

मान्यता प्रक्रिया को लेकर दी स्पष्ट जानकारी

डॉ. अशोक गदिया ने कहा कि बीएससी नर्सिंग कोर्स वर्ष 2022 के सत्र से विश्वविद्यालय में प्रारंभ किया गया था और यह एक यूजीसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय द्वारा संचालित कार्यक्रम है। उन्होंने बताया कि राजस्थान हाईकोर्ट के निर्देशों के अनुरूप राजस्थान नर्सिंग काउंसिल (RNC) और इंडियन नर्सिंग काउंसिल (INC) को निरीक्षण के लिए पत्र भेजा गया है।

उनका कहना है कि किसी भी नर्सिंग संस्थान में पाठ्यक्रम की मान्यता के लिए निरीक्षण और अनापत्ति प्रमाण पत्र जारी करने की प्रक्रिया एक सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया होती है। इसी प्रक्रिया के तहत निरीक्षण किया जाना है, जिसके बाद औपचारिक मान्यता जारी की जाती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस प्रक्रिया को लेकर भ्रम फैलाया गया है, जबकि विश्वविद्यालय लगातार नियमानुसार कदम उठा रहा है।

प्रदर्शन को बताया सुनियोजित व्यवधान

यूनिवर्सिटी प्रशासन का कहना है कि 11 फरवरी से शुरू हुए छात्र प्रदर्शन के दौरान परिसर में कई ऐसी घटनाएँ हुईं जिनसे शैक्षणिक वातावरण प्रभावित हुआ। डॉ. गदिया के अनुसार कुछ बाहरी तत्वों ने छात्रों को उकसाकर आंदोलन को अनावश्यक रूप से बढ़ाया।

उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदर्शन के दौरान कक्षाएँ बाधित की गईं, कुछ शिक्षकों को कमरों में बंद किया गया और परिसर की संपत्ति को नुकसान पहुँचाने की कोशिश भी हुई। विश्वविद्यालय ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए कुछ छात्रों को निलंबित करने और अस्थायी रूप से कक्षाएँ स्थगित करने का निर्णय लिया था। उनका कहना है कि यह कदम केवल शैक्षणिक अनुशासन बनाए रखने के लिए उठाया गया था।

जांच का स्वागत, निष्पक्षता की मांग

नर्सिंग कोर्स को लेकर दर्ज एफआईआर और लगाए गए आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए डॉ. गदिया ने कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन किसी भी प्रकार की जांच से नहीं डरता। उन्होंने राज्य सरकार से आग्रह किया कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए ताकि वास्तविक स्थिति सामने आ सके।

उन्होंने यह भी कहा कि विश्वविद्यालय के खिलाफ लगाए गए कई आरोप राजनीतिक या संस्थागत प्रतिस्पर्धा के कारण भी सामने आते रहे हैं, लेकिन हर बार विश्वविद्यालय ने पारदर्शिता के साथ जांच का स्वागत किया है।

छात्रों को भरोसा: डिग्री और परीक्षाएँ सुरक्षित

चेयरमैन डॉ. गदिया ने छात्रों और उनके अभिभावकों को आश्वस्त करते हुए कहा कि किसी भी विद्यार्थी का शैक्षणिक भविष्य खतरे में नहीं है। उन्होंने कहा कि मान्यता की प्रक्रिया पूरी होते ही परीक्षाएँ आयोजित होंगी और छात्रों को मान्य डिग्री प्रदान की जाएगी।

उन्होंने छात्रों से अपील की कि वे किसी भी प्रकार की अफवाहों पर ध्यान न दें और पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित करें। विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि संस्थान की प्राथमिकता हमेशा विद्यार्थियों का भविष्य सुरक्षित रखना और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करना रहा है।

स्थिति सामान्य होने की उम्मीद

लगातार चले विरोध और कानूनी प्रक्रियाओं के बाद अब परिसर में तनाव कम होने की बात सामने आ रही है। विश्वविद्यालय प्रशासन का दावा है कि संवाद और कानूनी प्रक्रिया के माध्यम से यह विवाद जल्द पूरी तरह समाप्त हो जाएगा।

डॉ. अशोक गदिया का कहना है कि मेवाड़ यूनिवर्सिटी वर्षों से देश के विभिन्न राज्यों के विद्यार्थियों को शिक्षा दे रही है और संस्थान की प्रतिष्ठा तथा छात्रों के भविष्य की रक्षा करना प्रशासन की सर्वोच्च जिम्मेदारी है।

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