अंबाला के बिचपड़ी गांव में पारिवारिक विवाद हिंसा में बदला, 95 वर्षीय दादी की गोली लगने से मौत
अंबाला। हरियाणा के अंबाला शहर के निकट स्थित बिचपड़ी गांव में रविवार को पारिवारिक संपत्ति विवाद हिंसक रूप ले बैठा। परिवार के भीतर जमीन से मिट्टी बेचने से प्राप्त धन के बंटवारे को लेकर चल रहे विवाद के बीच गोली चलने की घटना में 95 वर्षीय बुजुर्ग महिला की मौत हो गई, जबकि दो से तीन अन्य लोग घायल बताए जा रहे हैं।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, परिवार के सदस्यों के बीच लंबे समय से आर्थिक विवाद चल रहा था। बताया जा रहा है कि परिवार का एक युवक जमीन की मिट्टी बेचने से प्राप्त राशि में अपना हिस्सा तत्काल चाहता था, जबकि अन्य सदस्य उसे पैसे देने के पक्ष में नहीं थे। इसी विवाद के दौरान युवक ने कथित रूप से पिस्तौल निकालकर गोली चला दी।
गोली लगने से परिवार की 95 वर्षीय बुजुर्ग दादी गंभीर रूप से घायल हो गईं। उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां उपचार के दौरान उनकी मृत्यु हो गई। घटना में परिवार के अन्य सदस्य भी घायल हुए हैं। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
स्थानीय लोगों के अनुसार, आरोपी युवक अपने व्यवहार को गलत मानने के लिए भी तैयार नहीं है। उसका कहना है कि परिवार में उसकी आर्थिक जरूरतों और हिस्सेदारी की लगातार अनदेखी की जा रही थी।
परिवार व्यवस्था और सामाजिक ढांचे पर उठे सवाल
घटना के बाद गांव और आसपास के क्षेत्र में केवल अपराध ही नहीं, बल्कि परिवार व्यवस्था और सामाजिक नियंत्रण तंत्र को लेकर भी चर्चा शुरू हो गई है। कई लोगों का कहना है कि पारिवारिक विवादों के समाधान के लिए परिवारों के भीतर कोई स्पष्ट नियम, मध्यस्थता व्यवस्था या निर्णय प्रणाली नहीं होने के कारण छोटे विवाद कई बार हिंसक रूप ले लेते हैं।
सामाजिक विश्लेषकों का मानना है कि संयुक्त परिवारों में संपत्ति, आय और जिम्मेदारियों को लेकर स्पष्ट सहमति और संवाद तंत्र का अभाव लगातार तनाव पैदा करता है। वहीं, हथियारों की उपलब्धता और उन पर सामाजिक नियंत्रण की कमी भी ऐसी घटनाओं को गंभीर बना देती है।
बजरंग मुनि के अनुसार, “संयुक्त संपत्ति और संयुक्त उत्तरदायित्वों के साथ रहने वाले व्यक्तियों के समूह को ही परिवार कहा जाना चाहिए।” उनका मानना है कि यदि परिवारों का अपना सर्वसम्मत संविधान, स्पष्ट उत्तरदायित्व व्यवस्था और विवादों के निपटारे की न्यायोचित प्रणाली विकसित हो, तो इस प्रकार की घटनाओं पर काफी हद तक अंकुश लगाया जा सकता है।
ग्राम और family स्तर पर समाधान की बहस
घटना के बाद कुछ सामाजिक संगठनों और विचारकों ने परिवार आधारित अनुशासन व्यवस्था की आवश्यकता पर जोर दिया है। उनका कहना है कि परिवारों में संपत्ति, अधिकार, जिम्मेदारी और विवाद समाधान के लिए स्पष्ट नियम होने चाहिए। साथ ही यदि किसी सदस्य को निर्णय पर आपत्ति हो तो परिवार स्तर और ग्राम स्तर पर शिकायत और मध्यस्थता की व्यवस्था विकसित की जानी चाहिए।
विशेषज्ञों के अनुसार, वर्तमान कानून व्यवस्था अधिकतर अपराध होने के बाद कार्रवाई करती है, जबकि समाज के भीतर प्रारंभिक स्तर पर विवाद समाधान तंत्र कमजोर बना हुआ है। ऐसे में परिवार और ग्राम स्तर पर संवाद, मध्यस्थता और अनुशासन व्यवस्था को मजबूत करने की आवश्यकता महसूस की जा रही है।
फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है और गांव में तनावपूर्ण शांति बनी हुई है।
